एनीमिया यानी खून की कमी वैश्विक स्तर पर देखी जा रही गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। एनीमिया की स्थिति कई दूसरी बीमारियों को बढ़ाने वाली मानी जाती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि महिलाएं इस समस्या का सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। भारत में 57% से ज्यादा किशोरी और महिलाएं खून की कमी की समस्या का शिकार हैं।
जानना जरूरी: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के बारे में जानते हैं आप? ये सामान्य एनीमिया से कितना अलग और कितना खतरनाक
Megaloblastic Anemia: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया, खून की कमी की समस्या है, जो मुख्य रूप से विटामिन बी12 या फोलेट की कमी से होती है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से बड़ी हो जाती हैं। इस तरह की एनीमिया के कारण थकान-चक्कर, कमजोरी और झनझनाहट जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि ये सामान्य एनीमिया की दिक्कत से कितनी अलग है?
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया और इसके खतरे
वैश्विक स्तर पर, एनीमिया लगभग 40% प्री-स्कूल बच्चों और 30-37% महिलाओं को प्रभावित करता है, हालांकि इनमें से सभी मामले 'मेगालोब्लास्टिक' नहीं होते हैं। मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के एक प्रकार मैक्रोसाइटोसिस, आम आबादी के 2 से 4% लोगों को प्रभावित करता है। इनमें से लगभग 60% मामलों में एनीमिया का कारण शराब का सेवन, फोलेट या विटामिन बी12 की कमी होता है।
- मेगालोब्लास्टिक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पातीं और आकार में बड़ी हो जाती हैं।
- विटामिन बी12 या फोलेट (विटामिन बी9) की कमी को इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
सामान्य एनीमिया में भी हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और आयरन की कमी समेत इसके कई अलग-अलग कारण होते हैं। मेगालोब्लास्टिक एनीमिया को समय पर पहचानना जरूरी है, क्योंकि खासकर विटामिन बी12 की लंबे समय तक कमी रहने पर नसों और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती है।
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया क्या होता है?
हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं हीमोग्लोबिन की मदद से ऑक्सीजन को अलग-अलग अंगों तक पहुंचाती हैं। जब इन कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है, तो वे सामान्य से बड़े आकार की हो सकती हैं। इस स्थिति को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहते हैं।
- विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसी तरह से फोलेट, कोशिकाओं के विकास और डीएनए बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। इन दोनों की कमी के कारण लोगों में मेगालोब्लास्टिक एनीमिया होने का खतरा बढ़ सकता है।
- इसके अलावा अध्ययनों में पाया गया है कि पेट या आंतों की कुछ बीमारियों और सर्जरी के बाद कई लोगों के शरीर में विटामिन्स ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। इस वजह से भी विटामिन बी12 या फोलेट की कमी हो सकती है जिसके कारण आप मेगालोब्लास्टिक एनीमिया का शिकार हो सकते हैं।
सामान्य एनीमिया और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया में अंतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, दोनों ही स्थितियों में शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, लेकिन इनके कारण और रक्त कोशिकाओं की बनावट अलग हो सकती है।
सामान्य एनीमिया आयरन की कमी, रक्तस्राव, क्रॉनिक बीमारियाों के कारण होता है। जबकि मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कोशिकाओं के विकास और डीएनए बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी से संबंधित होता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं अक्सर सामान्य से बड़े आकार की होती हैं।
- मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। कई बार शुरुआत में आपको इस समस्या का अंदाजा भी नहीं होता। इसके कारण लगातार थकान, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। कई लोगों में त्वचा के पीला पड़ने और थोड़े काम से सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
- विटामिन बी12 की कमी के कारण हाथ-पैर सुन्न होने, झनझनाहट, याददाश्त या संतुलन से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। गंभीर मामलों में लाल रक्त कोशिकाओं के अलावा सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स भी कम हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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