Flu In Delhi-NCR: बरसात के बाद के कुछ महीने हर साल कई प्रकार की बीमारियों का खतरे को बढ़ाने वाले माने जाते रहे हैं। सितंबर-अक्तूबर के महीनों में तेजी से मौसम बदल रहा होता है जिसके कारण फ्लू संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ये मच्छर जनित रोगों के प्रकोप का भी समय होता है।
Alert: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रही 'कोरोना जैसे लक्षणों' वाली बीमारी, संक्रमितों में देखी जा रही ये दिक्कतें
- दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में H3N2 फ्लू की लहर देखी जा रही है, यह केवल सर्दी-खांस और बुखार से कहीं अधिक गंभीर है। कम्युनिटी आधारित एक सर्वे में पाया गया है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 50-70% घरों में संक्रमित देखे जा रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में फ्लू का खतरा
मीडिया रिपोर्टस से पता चलता है कि दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में H3N2 फ्लू की लहर देखी जा रही है, यह केवल सर्दी-खांस और बुखार से कहीं अधिक गंभीर है।
कम्युनिटी आधारित एक सर्वे में पाया गया है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 70% घरों में लोग संक्रमण का शिकार हैं। ज्यादातर लोगों को तेज बुखार, लगातार खांसी और सामान्य से अधिक समय तक रहने वाली थकान की दिक्कत हो रही है। चिंताजनक बात यह है कि कई लोग जो आमतौर पर फ्लू को नजरअंदाज कर देते थे, अब अधिक गंभीर लक्षणों का सामना कर रहे हैं।
H3N2 फ्लू के लक्षण हफ्ते भर से लेकर 15 दिनों तक भी देखे जा रहे हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रमुख और चिकित्सा निदेशक डॉ. अमित भार्गव कहते हैं, हर साल फ्लू के मामलों में दो बार बढ़ोतरी देखी जाती है-एक मानसून के दौरान और दूसरी सर्दियों में। इसके लक्षणों में बदन दर्द, खांसी और बुखार की गंभीरता बढ़ जाती है। H3N2 भी फ्लू का ही रूप है जो श्वसन रोग का कारण बनता है जिसमें खांसी, बुखार के साथ शरीर में दर्द की समस्या देखी जा ही हैं। संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क और दूषित सतहों को छूने से ये फैल सकता है।
डॉक्टर बताते हैं, बच्चे-बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से ही अस्थमा, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं जैसी क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। संक्रमण से ब्रोंकाइटिस, निमोनिया जैसी गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं और मौजूदा हृदय या फेफड़ों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
अस्पतालों की रिपोर्ट है कि कई लोगों में लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या वे इतने बीमार हो जाते हैं कि उन्हें भर्ती कराना पड़ता है।
संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टर कहते हैं इस संक्रमण से बचाव के लिए वही उपाय किए जाने चाहिए जो फ्लू और कोविड से बचाव के लिए होते हैं।
- बार-बार अपने हाथ धोना चाहिए। इसके लिए साबुन और पानी का उपयोग करें या फिर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
- बाहर जाते समय मास्क पहनें, खासकर जब भीड़ हो या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का डर हो।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों से जितना हो सके बचें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से पहले सावधानी बरतें।
- अपने खान-पान का ध्यान रखें। आहार में ताजे फल और सब्जियां खाएं, पर्याप्त पानी पिएं और पर्याप्त नींद लें। इससे शरीर मजबूत रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- यदि आपको 3 दिन से अधिक समय तक बुखार बना रहे, सांस लेने में कठिनाई हो, गले में गंभीर दर्द या सूजन हो इसके साथ चक्कर आने या उल्टी की दिक्कत हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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