मौसम बदलने या गले में होने वाले किसी प्रकार के संक्रमण के कारण अक्सर आपको अपनी आवाज में कुछ बदलाव महसूस हो सकता है। वायरस जब वोकलकार्ड या स्वरग्रंथियों पर हमला कर देता है, सामान्यतौर पर उस स्थिति में इस प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं, हालांकि यह समस्या दो-तीन दिनों में ठीक भी हो जाती है। पर अगर आपको कुछ समय से आवाज में अजीब सा बदलाव महसूस हो रहा है और यह सामान्य उपायों से ठीक नहीं हो रहा है तो इस बारे में सावधान हो जाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थाइराइड विकारों में भी लोगों को इस प्रकार की दिक्कत महसूस हो सकती है।
ध्यान दें: आवाज में अजीब सा बदलाव महसूस होना इस गंभीर रोग का माना जाता है संकेत, ऐसे करें स्थिति की सही पहचान
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आवाज में बदलाव को लेकर बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थायरॉइड विकारों के कारण होने वाली इस तरह की समस्या में आपको आवाज में कई प्रकार के बदलाव महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों ने ऐसे स्थिति में रफ आवाज, आवाज कम होने, धीरे बोलने या कर्कश ध्वनि आने की शिकायत की है। विशेषज्ञ बताते हैं, थायरॉइड ग्रंथि की निष्क्रियता के कारण शारीरिक कार्यों की रफ्तार भी धीमी हो जाती है जिसके कारण तंत्रिकाओं से संबंधित कुछ विकार भी उत्पन्न होने लगते हैं। ध्वनि ग्रंथि में होने वाली समस्या के कारण आवाज में इस प्रकार का बदलाव हो सकता है जिसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
हाइपोथायरायडिज्म की गंभीरता के बारे में जानिए
डॉक्टर्स कहते हैं, आवाज में बदलाव की समस्या पर ध्यान देकर थाइरॉइड विकारों के बारे में समय रहते जाना जा सकता है। प्रारंभिक अवस्था में यह गले में खराश जैसी महसूस हो सकती है, कुछ दिनों तक बनी रहने वाली दिक्कत के बारे में डॉक्टर से सलाह लेकर जांच जरूर करा लेनी चाहिए।
हाइपोथायरायडिज्म का समय पर पहचान और इलाज आवश्यक है। इसके लक्षणों को अनदेखा करना अनियंत्रित रूप से वजन बढ़ने से लेकर कोमा तक और गंभीर मामलों में मृत्यु तक का भी कारण बन सकती है। हाइपोथायरायडिज्म के अन्य लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहें।
हाइपोथायरायडिज्म के संकेतों को जानिए
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हाइपोथायरायडिज्म की शुरुआती स्थिति में अक्सर लोगों को थकान और तेजी से वजन बढ़ने की समस्या होती है। जैसे-जैसे इस विकार में आपका मेटाबॉलिज्म धीमा होता जाता है, आपको और अधिक समस्याएं हो सकती हैं।
- ठंड के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाना।
- कब्ज- त्वचा का सूखापन।
- मांसपेशी में कमज़ोरी
- कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाना।
- जोड़ों में दर्द, जकड़न या सूजन।
- मासिक धर्म में अनियमितता।
- बालों का झड़ना
- हृदय गति कम हो जाना।
हाइपोथायरायडिज्म का खतरा किन्हें अधिक होता है?
हाइपोथायरायडिज्म से बचाव नहीं किया ज सकता है, समय पर इसके लक्षणों पर ध्यान देकर इसकी गंभीरता को कम किए जाने के उपाय किए जाने चाहिए। कुछ लोगों में इस रोग का खतरा अधिक होता है, इसके जोखिम को समझते हुए बचाव के उपाय करें।
महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हाइपोथायरायडिज्म का जोखिम अधिक होता है, इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को हाइपोथायरायडिज्म रह चुका है उन्हें भी सावधानी बरतनी चाहिए। अपने जोखिम कारकों को ध्यान में रखते हुए इसके लक्षणों पर ध्यान देकर बचाव के उपाय करने की सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।