नींद विकार, तेजी से बढ़ती हुई समस्या है जिसका जोखिम लगभग हर उम्र के व्यक्ति में देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि हम सभी रात में कम से कम 6-8 घंटे की निर्बाध नींद जरूर लें। नींद न आने की समस्या के कारण न सिर्फ थकान, कमजोरी जैसी दिक्कतों का जोखिम हो सकता है साथ ही अगर ये दिक्कत लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके कारण ब्लड प्रेशर और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
World Sleep Day: बिस्तर पर जाने के घंटों बाद भी नहीं आती है नींद? ये हो सकती है वजह, तुरंत कर लें सुधार
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नींद विकारों की समस्या
कई अध्ययनों से पता चलता है कि लंबे समय तक नींद न आने की समस्या से परेशान लोगों में कैंसर होने और इस बीमारी से मृत्यु का खतरा अधिक हो सकता है। नींद की कमी आपके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। इससे मनोदशा, स्मृति संबंधी परेशानी और सोचने और ध्यान केंद्रित करने में भी समस्या हो सकती है।
लगातार नींद की कमी से वजन बढ़ने, उच्च रक्तचाप और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की भी दिक्कत हो सकती है।
नींद न आने की समस्या के कारण
नींद न आने की समस्या के लिए एक टर्म है स्लीप स्ट्रेस, जिसका मतलब है कि आप नींद प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं फिर से इसमें लाभ नहीं मिल पाता है। नींद की गुणवत्ता को ठीक रखने के लिए सबसे जरूरी है कि हम तनाव-चिंता कम करने के लिए प्रयास करें। इसमें हमारी लाइफस्टाइल और आहार का भी बड़ा योगदान माना जाता है। कुछ आदतों में सुधार करके आप नींद की गुणवत्ता को बढ़ावा दे सकते हैं।
बेहतर नींद पाने के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जीवनशैली की आदतों में सुधार करके आप नींद की गुणवत्ता को ठीक कर सकते हैं। इसके लिए कुछ आदतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
- हर रोज एक ही समय पर सोने और सुबह एक ही समय पर उठने की आदत बनाएं।
- सुनिश्चित करें कि आपका शयनकक्ष शांत, अंधेरावाला और आरामदायक हो।
- सोने से पहले टीवी, कंप्यूटर और स्मार्ट फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग न करें।
- सोने से पहले भारी भोजन, कैफीन और शराब पीने से भी बचें।
- दिन के समय शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से आपको रात में अच्छी नींद लेने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।