शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए तमाम प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, प्रोटीन उन्हीं में से एक है। मांसपेशियों के निर्माण और उन्हें मजबूती देने में प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इतना ही नहीं मजबूत हड्डियों के निर्माण से लेकर वजन घटाने, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में भी इस मैक्रोन्यूट्रिएंट की भूमिका होती है। आहार में कई प्रकार की चीजों जैसे सब्जियां, डेयरी, नट्स, मांस, पनीर आदि से आसानी से पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है। पर क्या मांसपेशियों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आप प्रोटीन का बहुत अधिक मात्रा में सेवन तो नहीं कर रहे हैं?
प्रोटीन पॉइजनिंग: कहीं आप भी तो नहीं ले रहे हैं बहुत अधिक प्रोटीन? ऐसी समस्याओं के हो सकते हैं शिकार
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मूड संबंधी विकारों की समस्या
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, जो लोग एक साल तक बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन और बहुत कम कार्ब्स का सेवन करते हैं, उनमें नकारात्मक भावनाओं, मूड स्विंग, अवसाद और चिंता की समस्या का खतरा अधिक होता है। प्रोटीन की अधिकता और कार्ब्स की कमी के कारण मस्तिष्क में सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर घट जाता है, यही कारण है प्रोटीन का सही मात्रा में ही सेवन किया जाना चाहिए।
सांसों की दुर्गंध
केटोजेनिक आहार, जिसमें कार्ब्स से पूर्ण परहेज की सलाह दी जाती है, इससे शरीर में कीटोसिस की स्थिति पैदा हो सकती है। यह प्रक्रिया सभी संग्रहीत कार्ब्स को बाहर निकालती है और ऊर्जा के लिए फैट को बर्न करने लगती है, जिससे सांसों की बदबू आना स्वाभाविक है। इसलिए शरीर में कार्ब्स और प्रोटीन की मात्रा को नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।
निर्जलीकरण की समस्या
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हाइड्रेशन बहुत आवश्यक है, हालांकि प्रोटीन की अधिकता निर्जलीकरण की समस्या का कारण बन सकती है। शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाने के कारण मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है। ऐसे स्थिति में पेशाब के माध्यम से पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व बाहर निकलने लगते हैं। इसलिए, विशेषज्ञ पानी और खनिजों का संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।
बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल का स्तर
वैसे तो हृदय को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन के सेवन की सलाह दी जाती है, हालांकि इसका बहुत अधिक सेवन खतरनाक भी हो सकता है। प्रोटीन के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, डेयरी और पोल्ट्री में फैट की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए, जब आप इन खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाते हैं, तो वसा का स्तर भी बढ़ता है जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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