मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं सभी उम्र के लोगों में बढ़ती हुई देखी जा रही हैं, अब बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक देखा जा रहा है।
Mental Health: क्या स्ट्रेस और एंग्जाइटी एक ही हैं, कैसे जानें आपको कौन सी दिक्कत है? इन लक्षणों से करें पहचान
जब बात मेंटल हेल्थ की दिक्कतों की होती है तो स्ट्रेस-एंग्जाइटी, ये दो शब्द काफी चर्चा में रहते हैं। क्या ये एक ही समस्या हैं या फिर इन दोनों में कोई अंतर है? आइए इस समस्या को समझते हैं।
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स्ट्रेस और एंग्जाइटी की समस्या
स्ट्रेस और एंग्जाइटी मानसिक स्वास्थ्य की सबसे आम और प्रारंभिक स्तर की समस्याएं हैं। आप भी जीवन में कभी न कभी इससे परेशान रहे होंगे। ये परिस्थितिजन्य हो सकती हैं और ज्यादातर मामलों में खुद से ठीक भी हो जाती है इसलिए अक्सर लोगों का इस तरफ ध्यान नहीं जाता है।
हालांकि अगर आपको अक्सर या लंबे समय से स्ट्रेस या एंग्जाइटी की दिक्कत बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी हो जाता है, क्योंकि अगर समय रहते इसका निदान और उपचार न हो पाए तो भविष्य में डिप्रेशन जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।
एक ही नहीं हैं ये समस्याएं
स्ट्रेस और एंग्जाइटी अक्सर एक ही समझे जाते हैं, लेकिन ये दोनों मानसिक स्वास्थ्य की अलग-अलग स्थितियां हैं। दोनों के बीच कई अंतर हैं, जो उनके कारणों, लक्षणों, अवधि और प्रभावों में देखने को मिलती हैं।
- स्ट्रेस एक मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो किसी बाहरी दबाव या चुनौती के कारण उत्पन्न होती है। यह परिस्थितिजन्य जैसे परीक्षा, नौकरी का दबाव, आर्थिक तंगी के कारण हो सकती हैं।
- वहीं एंग्जाइटी एक प्रकार की भीतरी चिंता या भय है, जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है। यह आमतौर पर किसी भविष्य की आशंका से जुड़ी होती है।
क्या होते हैं इनके लक्षण?
स्ट्रेस और एंग्जाइटी के लक्षणों में कई समानताएं हैं। जब कोई व्यक्ति तनावग्रस्त होता है, तो उसकी धड़कन और सांस तेज हो जाती है, मूड से संबंधित समस्याएं जैसे चिड़चिड़ापन या गुस्सा हो सकता है, अकेलापन महसूस होने लगता है, मतली-चक्कर की दिक्कत होने लगती है। कई बार इसके कारण आपको पाचन की समस्या जैसे दस्त या कब्ज भी हो सकती है।
वहीं एंग्जाइटी में भी आपको इसी से मिलती-जुलती दिक्कतें होती हैं। इसमें भी दिल की धड़कन और सांस की गति बढ़ जाती है, बेचैनी या भय बना रहता है, पसीना आ सकता है।
मसलन दोनों समस्याओं में आमतौर पर एक जैसी दिक्कतें होती हैं इसलिए इनमें आसानी से अंतर कर पाना कठिन हो सकता है।
पहले से ही शुरू कर दीजिए उपाय
तनाव और चिंता शारीरिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इनके लक्षण भी एक जैसे होते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें अलग-अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है। तनाव आमतौर पर अल्पकालिक होता है और किसी ज्ञात खतरे की प्रतिक्रिया में होता है। जबकि चिंता या एंग्जाइटी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
चूंकि ये समस्याएं किसी को भी हो सकती हैं, इसलिए पहले से ही इससे बचाव के लिए सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
स्ट्रेस और एंग्जाइटी से बचे रहने या फिर इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ उपाय प्रभावी माने जाते हैं।
- समय का प्रबंधन करें। व्यायाम और मेडिटेशन की नियमित आदत बनाएं।
- पर्याप्त नींद लेना आपके मेंटल हेल्थ को ठीक रखने में मददगार है।
- लाइफस्टाइल और खान-पान को ठीक रखकर आप मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से बचाव कर सकते हैं।
अगर आपको अक्सर या लंबे समय तक स्ट्रेस-एंग्जाइटी की दिक्कत बनी रहती है तो इसे अनदेखा न करें और समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर लें। समय रहते अगर इसका इलाज करा लिया जाए तो डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।