Disadvantages of Wearing Earphones: आज की आधुनिक दुनिया में ईयरफोन या हेडफोन हमारी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। चाहे संगीत सुनना हो, पॉडकास्ट देखना हो, या घंटों तक ऑनलाइन मीटिंग करना हो, ईयरफोन का इस्तेमाल अब महज सुविधा नहीं, बल्कि एक जरूरत बन गया है। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईयरफोन का लंबे समय तक और तेज आवाज में इस्तेमाल आपकी सुनने की क्षमता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। इस समस्या को नॉइस इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस (एनआईएचएल) कहा जाता है।
Health Tips: लंबे समय तक ईयरफोन लगाना बढ़ा सकता है बहरेपन का जोखिम, जानें दिनभर में कितनी देर लगाना सुरक्षित
- आज के समय में बहुत से लोग ईयरफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि देर तक इसका इस्तेमाल करना कानों के लिए नुकसानदायक है।
- कुछ लोगों के दिमाग में ये भी सवाल होता है कि ईयरफोन और हेडफोन में से कौन-सा हमारे कानों के बेस्ट होता है? आइए इन्हीं सवालों का जवाब जानते हैं।
सुरक्षित सुनने की सीमा और 60/60 नियम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ '60/60 नियम' का पालन करने की सलाह देते हैं। इसका अर्थ है कि आपको ईयरफोन का इस्तेमाल अपने डिवाइस की अधिकतम आवाज के 60% से ज्यादा नहीं करना चाहिए, और इसे लगातार 60 मिनट से ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। 60 मिनट के बाद कानों को कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक देना जरूरी है। विषेशज्ञ सुझाव देते हैं कि दिनभर में 2 घंटे से ज्यादा ईयरफोन का उपयोग कानों से संबंधित बिमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। लंबे समय तक 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज सुनना कानों के लिए नुकसानदेह होता है।
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कान कैसे होते हैं क्षतिग्रस्त?
हमारे अंदरूनी कान में कॉक्लिया नामक संरचना होती है, जिसमें बाल जैसी छोटी संवेदनशील कोशिकाएं होती हैं। ये कोशिकाएं ध्वनि तरंगों को तंत्रिका संकेतों में बदलकर दिमाग तक भेजती हैं। जब ईयरफोन से लगातार तेज आवाज आती है, तो ये कोशिकाएं अत्यधिक कंपन के कारण स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
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बहरेपन के शुरुआती लक्षण
ईयरफोन के कारण होने वाले बहरेपन के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। इनमें सबसे प्रमुख है टिनिटस यानी कानों में लगातार घंटी बजने या सनसनाहट की आवाज आना। अन्य लक्षणों में सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई, या लोगों को बार-बार अपनी बात दोहराने के लिए कहना शामिल है। इन संकेतों को तुरंत गंभीरता से लें।
सुरक्षित रहने के लिए, ईयरफोन के बजाय ओवर-द-ईयर हेडफोन का इस्तेमाल करें, जो कान के पर्दे से थोड़ी दूरी बनाए रखते हैं। ओवर-द-ईयर हेडफोन का अर्थ है कि हेडफोन कान के ऊपर रखे जाते हैं और एक बड़े, गोल पैड की मदद से आपके पूरे कान को चारों ओर से कवर कर लेते हैं। नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन का उपयोग करें, ताकि बाहरी शोर को दबाने के लिए आपको आवाज को तेज न करना पड़े।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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