मजबूत इम्युनिटी हम सभी के लिए कितना आवश्यक है, यह कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने सभी लोगों को अच्छी तरह से समझा दिया है। कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से हम सभी ने आहार और दिनचर्या में उन आवश्यक बदलावों पर विशेष ध्यान दिया है, जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। अध्ययन बताते हैं कि मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली का बनना, एक सतत प्रक्रिया है, मतलब यह लगातार शरीर में चलते रहने वाली प्रक्रिया है, ऐसे में हमें हर दिन इस बारे में ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। इसके लिए जीवनशैली और स्वस्थ दिनचर्या का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
आज का हेल्थ टिप्स: इम्युनिटी को कमजोर कर देती हैं ये चीजें, कहीं आप भी तो नहीं करते हैं इनका सेवन?
तला हुआ भोजन है हानिकारक
क्या आपको भी बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजें खाना पसंद है? अगर हां तो सावधान हो जाइए इस तरह की चीजों को डॉक्टर्स सेहत के लिए बहुत हानिकारक मानते हैं। तले हुए खाद्य पदार्थों में एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (एजीई) अधिक होता है। भोजन को तलने के दौरान जब उच्च तापमान के कारण शर्करा, प्रोटीन या वसा के साथ प्रतिक्रिया करती है, तो इसके कारण एजीई उत्पादित होता है। इसका स्तर बढ़ना शरीर में सूजन और सेलुलर डैमेज का कारण बन सकता है। यही कारण है कि तली हुई चीजों का अधिक सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
मीठी चीजों के अधिक सेवन से बचें
इसमें कोई संदेह नहीं है कि ज्यादा मात्रा में चीनी का सेवन करने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि ब्लड शुगर को बढ़ावा देने के साथ मीठी चीजों का अधिक सेवन शरीर की इम्युनिटी को भी कमजोर कर सकती है। मीठी चीजों का सेवन कम करने से स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलती है। मीठी चीजें, विशेषकर एडेड शुगर वाले खाद्य-पेय पदार्थों को शरीर के लिए बहुत हानिकारक माना जाता है।
नमक का संयमित मात्रा में करें सेवन
चीनी के साथ-साथ आहार में नमक की भी मात्रा कम करने पर ध्यान देना जरूरी है। अधिक नमक वाली चीजें हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर कर देती हैं। चिप्स, फ्रोजन और फास्ट फूड्स में नमक की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा नमक वाले आहार, ऊतकों में सूजन को ट्रिगर करते हैं जिससे ऑटोइम्यून बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ओमेगा-6 के ज्यादा सेवन से बचें
आपके शरीर को कार्य करने के लिए ओमेगा-6 और ओमेगा-3, दोनों प्रकार के फैट्स की आवश्यकता होती है। पश्चिमी देशों के आहार में ओमेगा-6 की मात्रा अधिक, वहीं ओमेगा-3 की मात्रा कम होती है। यह असंतुलन इम्युनिटी को कमजोर करने के साथ कई प्रकार के रोगों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। ओमेगा-6 का अधिक मात्रा में सेवन इंफ्लामेशन का कारण बनती है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कमजोर कर सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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