शरीर के पोषण और विकास के लिए कई प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। विटामिन-डी ऐसा ही एक पोषक तत्व है जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ शरीर के लिए बेहद आवश्यक मानते हैं। विटामिन-डी की कमी शरीर के लिए कई गंभीर समस्याओं का कारक बन सकती है। कई गंभीर बीमारियों के रोगियों को ठीक करने में भी यह विटामिन काफी सहायक माना जाता है, हाल ही में कोरोना संक्रमण के दौरान भी लोगों को विटामिन-डी के सेवन की सलाह दी जा रही थी। इसी तरह से जिन रोगियों को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या होती है, उन्हें भी डॉक्टर सप्लीमेंट के तौर पर विटामिन-डी के सेवन की सलाह देते हैं।
सावधान: इस बीमारी में बेअसर साबित हुए विटामिन-डी सप्लीमेंट, कहीं आप भी तो नहीं करते हैं सेवन?
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आईबीएस में प्रभावी नहीं है विटामिन-डी
इंग्लैंड स्थित शेफील्ड विश्वविद्यालय में किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि आईबीएस के दर्दनाक लक्षणों को कम करने के लिए विटामिन-डी सप्लीमेंट्स को प्रभावी उपचार नहीं माना जा सकता है। विश्वविद्यालय के ऑन्कोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के वैज्ञानिकों ने विटामिन-डी सप्लीमेंट बनाने वाली एक कंपनी के साथ मिलकर लंबे समय से आईबीएस की समस्या से ग्रसित लोगों पर अध्ययन किया। इस अध्ययन के दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि क्या विटामिन-डी सप्लीमेंट, लक्षणों की गंभीरता को कम करके रोगियों के जीवन-स्तर में सुधार कर सकते हैं?
आईबीएस रोगियों के लक्षणों में नहीं हुआ कोई सुधार
रोगियों पर 12-सप्ताह तक किए गए परीक्षण के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन-डी सप्लीमेंट के सेवन से न तो रोग की गंभीरता कम होती है और न ही रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में कोई सुधार आता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ रोगियों में सप्लीमेंट के सेवन के कारण लक्षणों में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है, लेकिन इसे दीर्घकालिक उपचार के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना कि आईबीएस के रोगियों में विटामिन-डी की कमी होना सामान्य है। भले ही विटामिन-डी सप्लीमेंट इसके लक्षणों को कम करने में प्रभावी न पाया गया हो, फिर भी इसे विटामिन-डी की कमी के कारण होने वाली अन्य समस्याओं में लाभदायक माना जा सकता है। विटामिन-डी की कमी ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों में फ्रैक्चर जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। आईबीएस के रोगियों में विटामिन-डी की कमी होना सामान्य है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शेफील्ड विश्वविद्यालय में पोषण विभाग के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक डॉ लिज़ विलियम्स कहते हैं, लंबे समय से आईबीएस से पीड़ित रोगियों को इलाज के रूप में विटामिन डी के खुराक दिए जाते रहे हैं, हालांकि इस अध्ययन में हमने इसे प्रभावी नहीं पाया है। फिर भी यह ध्यान देने योग्य है कि विटामिन-डी सप्लीमेंट्स उन रोगियों में फायदेमंद साबित हो सकते हैं जिनको आईबीएस की समस्या के साथ विटामिन-डी की कमी के कारण कई अन्य तरह के रोगों की भी दिक्कत है।
आईबीएस और विटामिन-डी का संबंध
गौरतलब है कि शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने ही साल 2012 में पहली बार आईबीएस और विटामिन-डी की कमी के संबंधों के बारे में सूचित किया था। न्यूकैसल विश्वविद्यालय में मानव पोषण और स्वास्थ्य के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक प्रोफेसर बर्नार्ड कोर्फ़ कहते हैं, एक अनुमान के मुताबिक दुनिया की 10-15 फीसदी आबादी आईबीएस की दिक्कतों का सामना कर रही है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम इसके निदान और उपचार के नए तरीकों को खोजने के लिए अनुसंधान जारी रखें।
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स्रोत और संदर्भ:
Vitamin D supplementation in people with IBS has no effect on symptom severity and quality of life: results of a randomised controlled trial
अस्वीकरण नोट: यह लेख शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।