कोरोना संक्रमण के इस दौर में हम सभी ने कई सारी ऐसी चीजों का सेवन किया जिसे इम्युनिटी पावर को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता रहा है। शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने के लिए इस दौरान आयुर्वेद ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आयुर्वेद में कई सारी ऐसी जड़ी-बूटियों का जिक्र मिलता है जिनका सेवन शरीर को अंदुरुनी शक्ति प्रदान करने के साथ बीमारियों से लड़ने की भी ताकत देता है, गिलोय ऐसी ही एक औषधि है। कोरोना के इस दौर में शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के लिए गिलोय के काढ़े का सेवन किया गया। हालांकि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज ने लोगों को भ्रम में डाल दिया है।
Fact Check: 'गिलोय के सेवन से डैमेज हो सकता है लिवर !' जानिए क्या है इस वायरल मैसेज की सच्चाई?
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गिलोय से लिवर की बीमारियों का दावा
आयुर्वेद में गिलोय के सेवन को लेकर तमाम तरह के स्वास्थ्य लाभ का जिक्र मिलता है। इम्युनिटी पावर को बढ़ाने से लेकर, पाचन को ठीक रखने और एलर्जी की दिक्कतों को कम करने के लिए गिलोय के सेवन को लाभदायक माना जाता रहा है। हालांकि वायरल संदेश में गिलोय के लिवर पर हानिकारक प्रभावों का दावा किया जा रहा है। इस संबंध में आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है, आइए इस बारे में जानते हैं।
क्या है वायरल मैसेज की सच्चाई?
In #Ayurveda, Giloy is known as the best rejuvenating herb. Its therapeutic applications in traditional systems of medicine & management of #COVID19, have been significant. Guduchi has also been instrumental in treating various metabolic disorders. pic.twitter.com/kjBqcT990y
आयुष मंत्रालय ने ट्वीट कर स्पष्ट किया है कि, आयुर्वेद में गिलोय को कायाकल्प करने वाली जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है। कोविड-19 की चिकित्सा और इससे बचाव के लिए भी गिलोय के सेवन के लाभ के बारे में पता चलता है। गिलोय मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों के इलाज में भी सहायक है। सोशल मीडिया पर गिलोय के सेवन से लिवर की बीमारियों के खतरे को लेकर वायरल संदेश महज अफवाह है। गिलोय का सेवन करना पूरी तरह स्वस्थ है।
मंत्रालय ने किया स्पष्ट
आयुष मंत्रालय ने लिवर पर गिलोय के हानिकारक प्रभाव के दावों का खंडन करते हुए कहा कि गिलोय का सेवन करना सेहत के लिए पूरी तरह से स्वस्थ है, इससे किसी भी तरह का जहरीला प्रभाव नहीं है। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में वर्षों से इस औषधि को प्रयोग में लाया जाता रहा है, कोविड-19 के दौर में इसका उपयोग और बढ़ा है। समग्र स्वास्थ्य लाभों को ध्यान में रखते हुए गिलोय के विषाक्त होने का दावा पूरी तरह से झूठ है, लोगों को इससे भ्रमित नहीं होना चाहिए।
क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य
अमर उजाला से बातचीत में आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य मनीष कहते हैं, वर्षों से गिलोय का सेवन कई तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए लोगों ने काढ़े के रूप में इसका सेवन किया। वैसे तो इसके सेवन का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है, हालांकि इसका अधिक सेवन करने वाले लोगों को मितली जैसी दिक्कतों का अनुभव हो सकता है। पर गिलोय के कारण लिवर डैमेज जैसी समस्या होना बिल्कुल झूठ है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।