उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार (5 फरवरी) को वित्तवर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश किया। वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने प्रदेश के संपूर्ण विकास को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाओं की घोषणा की है। बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, असाध्य रोगों के इलाज के लिए 125 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है।
UP Budget 2024: दिमागी बुखार और इससे मृत्युदर को कम करने में मिली सफलता, जानिए कितनी गंभीर रही है ये बीमारी
पहले जापानी एन्सेफलाइटिस के बार में जानिए
जापानी एन्सेफलाइटिस, मच्छर जनित वायरल संक्रमण है। यह एशिया में वायरल एन्सेफलाइटिस का प्रमुख कारण है। वायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से इसके इंसानों में फैलाने का खतरा हो सकता है। ये वायरस घोड़ों और सुअरों को भी संक्रमित कर सकती है। बच्चों में जापानी एन्सेफलाइटिस विकसित होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
हल्के स्तर के जापानी एन्सेफलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को केवल बुखार और सिरदर्द हो सकता है, लेकिन अगर समय रहते इसकी पहचान या इलाज न की जाए तो रोग के गंभीर और घातक रूप लेना का खतरा अधिक हो सकता है।
गंभीर हो सकते हैं इसके लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जापानी एन्सेफलाइटिस की शुरुआती स्थिति में सिरदर्द, तेज बुखार, झटके आने, जी मिचलाना-उल्टी, गर्दन में अकड़न या लकवा की समस्या हो सकती है। हालांकि रोग के बढ़ने के साथ गंभीर बेहोशी, बच्चों में अनियंत्रित तौर पर झटके आने, अंडकोष में सूजन जैसी जटिलताओं का खतरा हो सकता है।
जापानी एन्सेफलाइटिस मस्तिष्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। कुछ रोगियों में इसके कारण बहरापन, भावनात्मक विकार और शरीर के एक तरफ लकवा की दिक्कत होने का खतरा बढ़ सकता है।
एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोंम क्या है?
एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) मुख्यरूप से बच्चों और युवा वयस्कों को प्रभावित करती है, इसके कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। एईएस के कारण रोगी में तीव्र बुखार की समस्या के साथ कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे मानसिक भ्रम या कोमा खतरा हो सकता है। वायरल एन्सेफलाइटिस के अलावा, लेप्टोस्पायरोसिस और टॉक्सोप्लाज्मोसिस का गंभीर रूप वाले एईएस का कारण बन सकती है।
एन्सेफलाइटिस से कैसे करें बचाव?
डॉक्टर कहते हैं, किसी को भी एन्सेफलाइटिस का खतरा हो सकता है, विशेषतौर पर जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है उनमें संक्रमण के गंभीर रूप लेने और जोखिमों के बढ़ने की समस्या अधिक देखी जाती रही है। वायरल एन्सेफलाइटिस को रोकने का सबसे अच्छा तरीका, वायरस के संपर्क से बचना है।
मच्छरों के काटने से बचाव के साथ हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना, बर्तन और कपड़ों को साझा न करना, बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी माना जाता है। मच्छरों को पनपने से रोकने वाले उपाय करते एन्सेफलाइटिस और मच्छर जनित अन्य रोगों के खतरे से बचाव किया जा सकता है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।