थायरॉइड, हमारे शरीर की महत्वपूर्ण ग्रंथि है पर क्या हम इसपर ध्यान देते हैं? शायद नहीं। अक्सर बहुत अधिक वजन बढ़ने की स्थिति को थायरॉइड की समस्या से जोड़कर देखा जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि इसके दुष्प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं हैं, इस ग्रंथि में होने वाली समस्याएं प्रजनन जैसे गंभीर विकारों का भी कारक हो सकती हैं। महिला और पुरुष दोनों में थायरॉइड के कारण होने वाली दिक्कतों को देखा जाता रहा है।
Thyroid Problem: थायरॉइड से सिर्फ मोटापा ही नहीं प्रजनन समस्याओं का भी हो सकता है खतरा, ऐसे कर सकते हैं बचाव
थायरॉइड में समस्या के दुष्प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी की समस्या जिसे हाइपोथायरायडिज्म के नाम से भी जाना जाता है, इसके कारण ओव्यूलेशन, अंडों के रिलीज होने की दिक्कत बढ़ने का खतरा हो सकता है। अगर लंबे समय तक थायरॉइड हार्मोन में कमी की दिक्कत बनी रहती है तो इसके कारण प्रजनन विकारों का भी खतरा हो सकता है। इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म के कुछ अंतर्निहित कारण जैसे कि कुछ ऑटोइम्यून या पिट्यूटरी विकारों के कारण भी प्रजनन क्षमता में कमी आ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थायरॉइड ग्रंथि को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिनचर्या में कुछ बदलाव करने से लाभ मिल सकता है।
दिनचर्या में व्यायाम को करें शामिल
थायरॉइड विकारों के जोखिम को कम करने में नियमित व्यायाम करके लाभ पाया जा सकता है। नियमित रूप से मध्यम स्तरीय व्यायाम, थायरॉइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने और प्रजनन क्षमता में सुधार करने में मददगार हैं। कुछ प्रकार के योग के अभ्यास की मदद से हार्मोन्स के स्राव को ठीक रखा जा सकता है। व्यायाम, संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।
थायरॉइड परीक्षण आवश्यक
डॉक्टर बताते हैं जो महिलाएं गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए नियमित थायरॉइड परीक्षण आवश्यक है। थायरॉइड फंक्शन समय के साथ बदल सकता है और परीक्षण के माध्यम से समस्याओं का शीघ्र पता लगाने में मदद मिल सकती है। समय रहते अगर समस्या का पता लगाने और उपचार प्राप्त करने से इसकी जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है। अपने नियमित स्वास्थ्य जांच में भी थायरॉइड फंक्शन टेस्ट को शामिल किया जाना चाहिए।
योग को बनाएं दिनचर्या की हिस्सा
दीर्घकालिक रूप से तनाव की समस्या थायरॉइड फंक्शन और प्रजनन क्षमता दोनों पर प्रभाव डाल सकती है। ध्यान, योग और माइंडफुलनेस जैसी तनाव को कम करने वाली गतिविधियों को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करके थायरॉइड के स्तर में सुधार किया जा सकता है। योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर न सिर्फ थायरॉइड फंक्शन में सुधार कर सकते हैं साथ ही प्रजनन की समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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