Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
थायरॉयड एक आम बीमारी है, लेकिन यह तेजी से अपने पांस पसार रही है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। खासकर महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान थायरॉयड की समस्या खूब देखने को मिलती है। हालांकि यह जांचने के लिए कि थायरॉयड की समस्या है या नहीं, डॉक्टर टेस्ट कराते हैं। अगर आपने कभी थायरॉयड का टेस्ट कराया हो तो आपने ध्यान दिया होगा कि रिपोर्ट पर T3, T4, TSH जैसे कुछ मेडिकल शब्द लिखे होते हैं। क्या आप जानते हैं कि इनका मतलब क्या होता है? आइए जानते हैं इसके बारे में...
सलाह: थायरॉयड में T3, T4 और TSH टेस्ट का क्या मतलब? जानें मरीज कैसे चेक करें अपनी रिपोर्ट
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दरअसल, थायरॉयड तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि थायरॉयड दो प्रमुख हार्मोन पैदा करती है, जिसे ट्राईआयोडीनथायरोक्सिन यानी T3 और थायरॉक्सिन यानी T4 के नाम से जाना जाता है। जब शरीर अधिक या कम थायरॉयड हार्मोन बनाता है, तो डॉक्टर टेस्ट कराने के लिए कहते हैं।
थायरॉयड टेस्ट रिपोर्ट में T3 का क्या मतलब?
- T3 टेस्ट ट्राईआयोडीनथायरोक्सिन हार्मोन के स्तर की जांच करता है। आमतौर पर डॉक्टर यह टेस्ट तब करवाने के लिए कहते हैं, जब T4 और TSH टेस्ट के बाद हाइपरथायरॉयडिज्म की आशंका हो। यह समस्या तब होती है जब थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन हार्मोन का बहुत अधिक उत्पादन करती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हाइपरथायरॉयडिज्म शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज कर सकता है, जिससे अचानक से वजन कम हो सकता है और दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है।
थायरॉयड टेस्ट रिपोर्ट में T4 का क्या मतलब?
- T4 टेस्ट को थायरॉक्सिन टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि T4 का उच्च स्तर अतिसक्रिय थायरॉयड ग्रंथि यानी हाइपरथायरॉयडिज्म को दर्शाता है, जिसके लक्षणों में चिंता, वजन घटना और दस्त शामिल हैं। हालांकि आमतौर पर T4 और TSH टेस्ट को एक साथ कराने की सलाह दी जाती है।
थायरॉयड टेस्ट रिपोर्ट में TSH का क्या मतलब?
- टीएसएच टेस्ट खून में थायरॉयड स्टिम्यूलेटिंग हार्मोन के स्तर को मापता है। दरअसल, थायरॉयड ग्रंथि ठीक से काम कर रही है या नहीं, यह पता करने के लिए टीएसएच टेस्ट कराया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपका टीएसएच का स्तर 2.0 से अधिक है, तो हाइपरथायरॉयडिज्म बढ़ने का खतरा रहता है, जबकि टीएसएच का कम स्तर अतिसक्रिय थायरॉयड को दर्शाता है। दरअसल, इसका मतलब ये होता है कि शरीर में आयोडीन का स्तर बढ़ गया है।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।