चलना हो या दौड़ना, सीढ़ी चढ़ना हो या फिर साइकिल चलाना सारे काम हम अपने पैरों से करते हैं और इन सब काम का सीधा असर पैरों के जोड़ यानी घुटनों पर आता है। आजकल घुटनों में दर्द या फिर घुटना चटकने की शिकायत केवल बुजुर्गों को ही नहीं बल्कि नौजवानों में भी ये समस्या आम हो रही है। युवाओं में होने वाली ये समस्या उम्र के साथ बढ़ती ही जाती है। लेकिन जब हम इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो इसका इलाज घुटने का आपरेशन या फिर घुटना बदलने की सलाह देते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आपको कुछ बातें जान लेनी जरूरी है।
डॉक्टर बताते हैं कि युवाओं में होने वाली इस समस्या का कारण मोटापा, खेल के दौरान लगने वाली चोट या फिर आनुवांशिक कारण हो सकता है। लेकिन इन सबके अलावा घुटनों में तकलीफ का सबसे बड़ा कारण विटामिन डी की कमी है। लेकिन यहीं समस्या अगर बुढ़ापें में हो रही है तो इसका एक कारण घुटनों के कार्टिलेज का घिस जाना होता है। साथ ही, लोगों की गलत जीवनशैली भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है।
अगर आपकी उम्र कम है और आपको भी डॉक्टर ने घुटना बदलने की सलाह दी है तो एक बार फिर से विचार कर लें। कई डॉक्टरों का मानना हैं कि अपने खानपान में कैल्शियम, विटामिन डी और ओमेगा 3 फैटी एसिड को शामिल करके आप अपने जोड़ों को मजबूत बना सकते हैं। नियमित कसरत करें और घुटनों को तकलीफ पहुंचाने वाले काम जैसे सीढ़ी चढ़ना हो या फिर जमीन पर बैठना जैसे काम ना करें। इन सब सलाह को आजमाने से हो सकता है आपको आपरेशन की जरुरत ना पड़े और घुटनों के दर्द में कुछ राहत मिलें।
हालांकि घुटना प्रत्यारोपण से दिनचर्या पर कुछ खास असर नहीं पड़ता है और सारे काम आप सरलतापूर्वक कर सकते हैं। भारत में घुटना प्रत्यारोपण का आपरेशन सफलतापूर्वक हो जाता है। लेकिन फिर भी घुटना प्रत्यारोपित कराने से पहले अपने डॉक्टर से उसके बाद आने वाली किसी भी दिक्कत के बारे में अच्छे से सलाह ले कर ही अपना फैसला लें।