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कोरोना संक्रमण से देशवासियों को बचने के लिए वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया गया है। भारत में अब तक 22 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। जिन लोगों को वैक्सीन की एक डोज मिल चुकी है, वह दूसरी डोज के इंतजार में हैं। हाल ही में सरकार ने दोनों डोज के बीच के अंतराल को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है। टीकाकरण को लेकर हाल ही में जारी नई गाइडलाइंस के मुतबिक जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण हो चुका है, उन्हें ठीक होने के करीब तीन महीने बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए।
टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल अब भी हैं। इस लेख में हम विशेषज्ञ से जानेंगे कि वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में किन बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हैं? इसके साथ ही क्या हर किसी को टीकाकरण कराने से पहले कोरोना की जांच कराना जरूरी है?
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विशेषज्ञ ने बताया: वैक्सीनेशन से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्यान, ऐसे दूर करें साइड-इफेक्ट्स
Fri, 04 Jun 2021 04:43 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Fri, 04 Jun 2021 04:43 PM IST
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कोरोना की वैक्सीन सभी के लिए आवश्यक
- फोटो : pixabay
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कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- फोटो : iStock
वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्यान
अमर उजाला ने इस संबंध में जानने के लिए फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता से बात की। डॉ गुप्ता बताते हैं कि वैक्सीन सेंटर पर आपको कोविड के सभी नियमों का जरूर पालन करना चाहिए। अच्छी तरह के या दो मास्क लगाकर जाएं, जिसमें नाक और मुंह पूरी तरह से ढके हों। वैक्सीन लगवाने के लिए नॉन कोविड अस्पतालों का चयन करें। भीड़-भाड़ वाले समय पर न जाएं और ध्यान रखें टीका लगवाने से पहले आपका पेट खाली नहीं होना चाहिए।
वैक्सीन लगवाने के बाद करीब आधे घंटे तक सेंटर में मौजूद ऑब्जर्वेशन एरिया में जरूर बैठें। यदि आपको इस दौरान किसी भी तरह के असामान्य लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत वहां मौजूद डॉक्टर से इस बारे में संपर्क करें। यदि आपको वैक्सीन की पहली डोज के बाद कोई बहुत गंभीर समस्या हुई हो तो फिलहाल दूसरी डोज न लगवाएं।
अमर उजाला ने इस संबंध में जानने के लिए फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता से बात की। डॉ गुप्ता बताते हैं कि वैक्सीन सेंटर पर आपको कोविड के सभी नियमों का जरूर पालन करना चाहिए। अच्छी तरह के या दो मास्क लगाकर जाएं, जिसमें नाक और मुंह पूरी तरह से ढके हों। वैक्सीन लगवाने के लिए नॉन कोविड अस्पतालों का चयन करें। भीड़-भाड़ वाले समय पर न जाएं और ध्यान रखें टीका लगवाने से पहले आपका पेट खाली नहीं होना चाहिए।
वैक्सीन लगवाने के बाद करीब आधे घंटे तक सेंटर में मौजूद ऑब्जर्वेशन एरिया में जरूर बैठें। यदि आपको इस दौरान किसी भी तरह के असामान्य लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत वहां मौजूद डॉक्टर से इस बारे में संपर्क करें। यदि आपको वैक्सीन की पहली डोज के बाद कोई बहुत गंभीर समस्या हुई हो तो फिलहाल दूसरी डोज न लगवाएं।
कोरोना की जांच कराना हर बार जरूरी नहीं
- फोटो : iStock
क्या वैक्सीनेशन से पहले कोरोना की जांच जरूरी है?
डॉ गुप्ता बताते हैं कि वैक्सीनेशन से पहले कोरोना की जांच कराना बिल्कुल जरूरी नहीं है। आपको कोरोना की जांच सिर्फ तभी करानी चाहिए जब शरीर में इसके कोई संभावित लक्षण नजर आ रहे हों। हां, यदि आप कोविड संक्रमित हैं तो फिलहाल वैक्सीनेशन नहीं करानी चाहिए। ऐसे लोगों को संक्रमण से ठीक होने के बाद तीन महीने का इंतजार करना चाहिए।
डॉ गुप्ता बताते हैं कि वैक्सीनेशन से पहले कोरोना की जांच कराना बिल्कुल जरूरी नहीं है। आपको कोरोना की जांच सिर्फ तभी करानी चाहिए जब शरीर में इसके कोई संभावित लक्षण नजर आ रहे हों। हां, यदि आप कोविड संक्रमित हैं तो फिलहाल वैक्सीनेशन नहीं करानी चाहिए। ऐसे लोगों को संक्रमण से ठीक होने के बाद तीन महीने का इंतजार करना चाहिए।
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कोरोना से ठीक होने के बाद शरीर में बनी रहती है एंटीबॉडी
- फोटो : Pixabay
यह कारण है
सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि जिन लोगों को पहले वैक्सीन नहीं लगी है और वह कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट चुके हैं उन्हें संक्रमण वाले दिन से 90 दिनों के बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) में प्रतिरक्षा वैज्ञानिक डॉक्टर विनीता बल का कहती हैं कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी इम्यूनिटी कुछ महीनों तक सक्रिय रहती है, ऐसे में ठीक होने के 6-8 सप्ताह के बाद ही ऐसे लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि जिन लोगों को पहले वैक्सीन नहीं लगी है और वह कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट चुके हैं उन्हें संक्रमण वाले दिन से 90 दिनों के बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) में प्रतिरक्षा वैज्ञानिक डॉक्टर विनीता बल का कहती हैं कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी इम्यूनिटी कुछ महीनों तक सक्रिय रहती है, ऐसे में ठीक होने के 6-8 सप्ताह के बाद ही ऐसे लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
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कोरोना के साइड-इफेक्ट्स को आसानी से करें दूर
- फोटो : iStock
वैक्सीनेशन के बाद साइड-इफेक्ट्स कैसे कम करें?
वैक्सीन लेने के बाद कई लोगों में इसके साइड-इफेक्ट्स के रूप में बुखार, थकान और कमजोरी महसूस होने की शिकायत देखी गई थी। डॉ गुप्ता कहते हैं कि वैसे तो यह समस्याएं एक से दो दिनों में स्वत: ठीक हो जाती हैं, फिर भी यदि आपको ज्यादा दिक्कत हो रही हो तो आप पैरासिटामॉल ले सकते हैं। ध्यान रहे, टीकाकरण के बाद कुछ दिनों तक किसी तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
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नोट: यह लेख फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ गुप्ता को कोरोना मरीजों के इलाज का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
वैक्सीन लेने के बाद कई लोगों में इसके साइड-इफेक्ट्स के रूप में बुखार, थकान और कमजोरी महसूस होने की शिकायत देखी गई थी। डॉ गुप्ता कहते हैं कि वैसे तो यह समस्याएं एक से दो दिनों में स्वत: ठीक हो जाती हैं, फिर भी यदि आपको ज्यादा दिक्कत हो रही हो तो आप पैरासिटामॉल ले सकते हैं। ध्यान रहे, टीकाकरण के बाद कुछ दिनों तक किसी तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
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नोट: यह लेख फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ गुप्ता को कोरोना मरीजों के इलाज का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।