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आपका सोने का तरीका बताता है आपकी मानसिक सेहत के बारे में, जानिए कैसी नींद आपके लिए ठीक नहीं है

Sat, 09 Jan 2021 06:06 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Sat, 09 Jan 2021 06:06 PM IST
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the way you sleep tells about your mental health in hindi
नींद का शरीर और मस्तिष्क पर पड़ता है प्रभाव - फोटो : Social Media

जीवन में बहुत जरूरी है कि नींद अच्छी हो क्योंकि यदि नींद अच्छी होती है तो अपने आप ही कई सारी चीजें बेहतर हो जाती है लेकिन यदि नींद के साथ कुछ समस्या है तो वह मानसिक और शारीरिक सेहत, दोनों को ही प्रभावित करती है। कुछ लोगों को बहुत गहरी नींद आती है तो कुछ की नींद बार- बार खुल जाती है, दोनों ही स्थितियों के अपने- अपने दुष्प्रभाव है। अगली स्लाइड्स से जानिए किस प्रकार की नींद का शरीर और मस्तिष्क पर पड़ता है कैसा प्रभाव। 






 

 

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बेहोशी में सोना भी अच्छा संकेत नहीं है - फोटो : Social media

गहरी नींद सोना
कुछ लोगों को बिस्तर पर सोते ही बहुत गहरी नींद आ जाती है। यहां तक उन्हें कितना ही जगा लो वे हिलते तक नहीं है, ऐसे लोगों के लिए कई लोगों को तो लगता है कि कितना अच्छा है कि उन्हें सुकून की नींद आ रही है जो कि अच्छा भी है। बहुत जरूरी है कि आप जब सो रहे हों तो चिंतामुक्त होकर सोएं। नींद ऐसी ही होना चाहिए कि आपका शरीर अच्छे से चार्ज हो सके पर बेहोशी में सोना भी अच्छा संकेत नहीं है।

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कहीं न कहीं तनाव व एंग्जाइटी से गुजर रहे होते हैं - फोटो : Pixabay

कच्ची नींद आना
कई सारे लोगो की नींद बहुत कच्ची होती है, जरा सी आहट से उनकी नींद टूट जाती है। ऐसा इसलिए होता क्योंकि वे लोग कहीं न कहीं तनाव व एंग्जाइटी से गुजर रहे होते हैं। कच्ची नींद के पीछे एक कारण यह भी है कि सोने के लिए आरामदायक स्थान का न मिल पाना। कच्ची नींद सोने वाले लोगों को शरीर और मन थका हुआ ही लगता है। नींद अच्छे से न हो पाने का बोझिल अहसास उनके शरीर पर भी हावी होने लगता है, जो कि ठीक नहीं है। 

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नींद में एक प्रकार का संतुलन होना बहुत आवश्यक है - फोटो : सोशल मीडिया

बहुत ज्यादा सोना
कई लोगों की आदत होती है कि कभी भी उन्हें सुला दो वो सोते ही रहेंगे मतलब कि यदि वे रात की 10 बजे सोएंगे तो भी सुबह 9 बजे उठेंगे और यदि वे रात की 8 बजे सोएंगे तब भी उनका यही हाल होगा। कच्ची नींद की तरह ही यह स्थिति भी ठीक नहीं है। बहुत ज्यादा सोने की समस्या उन लोगों में देखने में आती है, जो कहीं न कहीं अवसाद के दौर से गुजर रहे होते हैं इसलिए नींद में एक प्रकार का संतुलन होना बहुत आवश्यक है। 

 

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ज्यादा खर्राटे लेना आपके वजन को भी प्रभावित करता है - फोटो : social media
सोते वक्त खर्राटे लेना
सोते वक्त यदि कोई व्यक्ति कभी- कभी खर्राटे लेता है तो यह मान लिया जाता है कि थकान ज्यादा होगी लेकिन यदि स्वभाव किसी की आदत ही बन चुका है तब तो बिल्कुल ठीक नहीं है। सोते समय खर्राटे लेने की वजह साइनस, शराब का सेवन, एलर्जी, ठंड आदि शामिल है। ज्यादा खर्राटे लेना आपके वजन को भी प्रभावित करता है। साथ ही यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है इसलिए चिकित्सक को जरूर दिखाएं। 
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