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Menstrual Hygiene: मासिक धर्म स्वच्छता नीति बनाने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी, 31 अगस्त तक का समय

Mon, 24 Jul 2023 03:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 24 Jul 2023 03:46 PM IST
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supreme court warned states not to submit response on forming uniform national policy on menstrual hygiene
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : iStock

मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्ती दिखाई है। उच्चतम न्यायालय ने उन राज्यों को चेतावनी दी जिन्होंने स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता पर राष्ट्रीय नीति बनाने को लेकर अब तक केंद्र सरकार को जवाब नहीं सौंपा है। हाल ही में केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसे अब तक केवल चार राज्यों की ही इसपर प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है, शेष की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। 



गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 10 अप्रैल को केंद्र से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने और स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों की मासिक धर्म स्वच्छता के प्रबंधन के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से एक मॉडल तैयार करने को कहा था। इस  संबंध में केंद्र सरकार से प्राप्त सूचना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

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मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर सख्ती - फोटो : istock

राज्यों को 31 अगस्त तक का दिया समय

सोमवार के देश की शीर्ष अदालत ने कहा, 31 अगस्त तक अगर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसा करने में विफल रहे तो इस दिशा में कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, जो राज्य डिफॉल्ट कर रहे हैं, उन्हें नोटिस दिया गया है। आगे कोई डिफॉल्ट होने पर अदालत कानून का सहारा लेने के लिए बाध्य होगी।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार को अब तक केवल चार राज्यों- हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से ही इनपुट प्राप्त हुआ है।

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स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन - फोटो : istock

स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता की मांग

शीर्ष अदालत ने कहा, यह अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है, केंद्र को सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त सभी स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता के प्रबंधन पर समान राष्ट्रीय नीति लागू करने के लिए तेजी दिखाने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि यह उस याचिका से जुड़ा मुद्दा है जिसमें केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली प्रत्येक छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग शौचालय का प्रावधान सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की थी।

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मासिक धर्म स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने की पहल - फोटो : Pixabay

कई राज्यों में नहीं हैं पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं

इससे पहले 10 अप्रैल को, शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समन्वय करने और राष्ट्रीय नीति तैयार करने के लिए डेटा एकत्र करने हेतु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था।

इसके साथ निर्देश दिया गया था कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन रणनीतियों और योजनाओं को चार सप्ताह की अवधि के भीतर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालन समूह को प्रस्तुत करना होगा।


यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि देश के कई राज्यों में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी स्कूली छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई शहरों में स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है जो काफी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता की आवश्यकताओं को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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