नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष में लगभग नौ महीने रहने के बाद अब पृथ्वी पर लौटने के लिए तैयार हैं। नासा की ओर से दी गई जानकारियों के मुताबिक 18 मार्च को शाम करीब 5:57 मिनट पर उनके धरती पर उतरने की उम्मीद है। दोनों बीते साल 2024 में जून में बोइंग के स्टारलाइनर यान से अंतरिक्ष पहुंचे थे, लेकिन यान में तकनीकी खराबी के चलते वापस नहीं आ सके।
Sunita Williams: धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स को हो सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं, विस्तार से जानिए
अंतरिक्ष यात्रा एक असाधारण अनुभव है, जिसके लिए यात्रियों को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि माइक्रोग्रैविटी में एक लंबा समय बिताने के दौरान अंतरिक्ष यात्री महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों से गुजरते हैं। आइए जानते हैं कि धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स को क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
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अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण सेहत पर क्या असर होता है?
.@NASA will provide live coverage of Crew-9’s return to Earth from the @Space_Station, beginning with @SpaceX Dragon hatch closure preparations at 10:45pm ET Monday, March 17.
अंतरिक्ष और पृथ्वी का जीवन बिल्कुल अलग होती है।
अंतरिक्ष यात्रा एक असाधारण अनुभव है, जिसके लिए यात्रियों को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसा सुनीता के यान के साथ हुआ, इसमें अंतरिक्ष में लंबा समय बिताना सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला हो सकता है। माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) में एक लंबा समय बिताने के दौरान अंतरिक्ष यात्री महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों से गुजरते हैं।
Splashdown is slated for approximately 5:57pm Tuesday, March 18: https://t.co/yABLg20tKX pic.twitter.com/alujSplsHm
अंतरिक्ष में समय बिताना जितना चैलेंजिंग है, पृथ्वी पर वापस लौटना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है। बिना गुरुत्वाकर्षण के अंतरिक्ष यात्रियों का शरीर भारहीनता (Weightlessness) का आदी हो जाता है। धरती पर वापसी के बाद शरीर को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में ढलने में महीनों भी लग सकते हैं। इस दौरान उन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
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धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्या दिक्कतें होती हैं?
मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है माइक्रोग्रैविटी के बाद दोबारा से गुरुत्वाकर्षण में आने के बाद थकान, चलने में कठिनाई होने के साथ और शरीर का बैलेंस बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसके अलावा माइक्रोग्रैविटी में, मांसपेशियां उस तरह से भार सहन नहीं कर पातीं, जैसा कि वे पृथ्वी पर करती हैं। इसके परिणामस्वरूप, अगले कुछ महीनों तक सुनीता को मसल्स अटॉर्फी की दिक्कत भी हो सकती है। मसल्स अटॉर्फी में मांसपेशी के ऊतकों का क्षय हो जाता है और ये बहुत पतले हो जाते हैं।
वापस लौटने के बाद विलियम्स और विल्मोर को अपनी मांसपेशियां कमजोर लग सकती हैं, जिससे खड़े होना, चलना और संतुलन बनाना शुरू में काफी मुश्किल हो सकता है।
चलना और शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है मुश्किल
नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने एक रिपोर्ट में बताया कि धरती पर वापस लौटने के बाद लंबे समय तक चलने में परेशानी होती रहती है क्योंकि शरीर का संतुलन बनाना कठिन होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को यात्रा के लंबे समय के बाद तक "बेबी फीट" जैसा अनुभव होता है। अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद सख्त त्वचा उतर जाती है और पैर बहुत नरम और कोमल हो जाते हैं। जब तक पैरों में फिर से सख्त त्वचा नहीं बन जाती, तब तक चलना काफी कष्टदायक हो सकता है।
स्वास्थ्य संबंधित इन समस्याओं का भी खतरा
धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को कुछ महीनों तक और भी कई समस्याएं बनी रह सकती हैं।
- अंतरिक्ष में ग्रैविटी कम होने के कारण हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की समस्या हो सकती है। वापस लौटने के बाद लंबे समय तक इससे संबंधित दिक्कतें परेशान करने वाली हो सकती हैं।
- अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। अंतरिक्ष में 10 महीने रहने के बाद विलियम्स और विल्मोर को वापस लौटने पर फ्रैक्चर होने या इससे संबंधित कई दिक्कतें बनी रह सकती हैं।
- अंतरिक्ष में रहने के कारण हृदय, मस्तिष्क और संचार प्रणाली भी प्रभावित होती है। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे सुनने की क्षमता में कमी, दृष्टि की कमजोरी और सेरेब्रल एडिमा यानी मस्तिष्क में सूजन होने की दिक्कत भी हो सकती है।
- अंतरिक्ष में स्पेस रेडिएशन के कारण अंतरिक्ष यात्रियों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कैंसर, डिजनरेटिव डिजीज और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं का खतरा भी रहता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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