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सावधान: कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को दोबारा संक्रमण का खतरा, अध्ययन में दावा

Mon, 21 Jun 2021 06:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 21 Jun 2021 06:48 PM IST
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study says, covid recovered patient could get reinfected, vaccination necessary
दोबारा संक्रमित होने का खतरा - फोटो : iStock

कोरोना से एक बार संक्रमित हो जाने के बाद सामान्य तौर पर लोगों को अगली बार के लिए सुरक्षित मान लिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण हो जाने के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज अगली बार संक्रमण से उस व्यक्ति को सुरक्षित रखती हैं। हालांकि हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोग दोबारा से संक्रमित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि लोगों में संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अलग-अलग देखी गई है। कुछ लोगों में पाया गया है कि शरीर में बनी एंटीबॉडीज, अल्फा और बीटा जैसे वेरिएंट्स से मुकाबले के लिए पर्याप्त सुरक्षात्मक नहीं मानी जा सकती हैं।


इस शोध के बाद से बहस शुरू हो गई है कि क्या संक्रमण के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज प्रभावी नहीं होती हैं? क्या जिन लोगों को पहले संक्रमण हो चुका है उनमें दोबारा संक्रमण होने का खतरा है? इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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कोविड संक्रमित होना मतलब पूर्ण सुरक्षा नहीं - फोटो : pixabay

क्या कहती है स्टडी?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल शेफील्ड, न्यूकैसल और बर्मिंघम के सहयोग से यह अध्ययन किया है। अध्ययन के प्री-प्रिंट रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि लोगों में कोरोना के एसिम्टोमेटिक लक्षण रहे हों या सिम्टोमेटिक, इसके आधार पर लंबे समय तक कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित मान कर चलना सही नहीं है, विशेषकर तब जब कोरोना के तमाम तरह के नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं।

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नए वेरिएंट्स ने बढ़ा दिया है खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

कई वेरिएंट्स से खतरा
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर क्रिस्टीना डॉल्ड कहती हैं, इस अध्ययन में हमने एसिम्टोमेटिक और सिम्टोमेटिक, दोनों तरह के लोगों पर शोध कर संक्रमण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज के बारे में जानने की कोशिश की। अध्ययन के निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि ये एंटीबॉडीज कोरोना के अल्फा और बीटा वेरिएंट्स से मुकाबले के लिए पर्याप्त नहीं पाई गई हैं। ऐसे में यह मान कर चलना कि जिन लोगों को एक बार संक्रमण हो गया है, उन्हें दोबारा इसका खतरा नहीं है, यह गलत है।

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कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay

एंटीबॉडीज कितनी असरदार?
क्रिस्टीना डॉल्ड कहती हैं, कोविड -19 के बाद बनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं, एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। इतना ही नहीं एसिम्टोमेटिक और सिम्टोमेटिक रूप से संक्रमित रह चुके कई लोगों में छह महीने बाद तक एंटीबॉडीज नहीं देखी गई हैं। सिम्टोमेटिक रूप से संक्रमण का शिकार रह चुके अधिकांश लोगों में छह महीने बाद तक औसत दर्जे की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जबकि अधिकांश एसिम्टोमेटिक संक्रमित रह चुके लोगों में इतनी भी प्रतिरक्षा नहीं पाई गई। ऐसे में दोबारा संक्रमण होने के खतरे को नकारा नहीं जा सकता है।

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कोरोना टीकाकरण सभी के लिए जरूरी - फोटो : पीटीआई

वैक्सीनेशन कराना सभी के लिए जरूरी
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया है कि लोगों को सिर्फ इसी आधार पर स्वयं को सुरक्षित मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह एक बार पहले संक्रमित हो चुके हैं। सभी लोगों को कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीनेशन जरूर करना चाहिए, क्योंकि यही एक उपाय है जो आपको सुरक्षित रख सकता है।
इस अध्ययन के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों के उस दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित रह चुके लोगों को 90 दिनों बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए। गौरतलब है कि भारत में भी इसी तरह के नियम का पालन किया जा रहा है।

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नोट:
यह लेख ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन की प्री-प्रिंट रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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