कोरोना से एक बार संक्रमित हो जाने के बाद सामान्य तौर पर लोगों को अगली बार के लिए सुरक्षित मान लिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण हो जाने के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज अगली बार संक्रमण से उस व्यक्ति को सुरक्षित रखती हैं। हालांकि हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोग दोबारा से संक्रमित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि लोगों में संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अलग-अलग देखी गई है। कुछ लोगों में पाया गया है कि शरीर में बनी एंटीबॉडीज, अल्फा और बीटा जैसे वेरिएंट्स से मुकाबले के लिए पर्याप्त सुरक्षात्मक नहीं मानी जा सकती हैं।
सावधान: कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को दोबारा संक्रमण का खतरा, अध्ययन में दावा
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क्या कहती है स्टडी?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल शेफील्ड, न्यूकैसल और बर्मिंघम के सहयोग से यह अध्ययन किया है। अध्ययन के प्री-प्रिंट रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि लोगों में कोरोना के एसिम्टोमेटिक लक्षण रहे हों या सिम्टोमेटिक, इसके आधार पर लंबे समय तक कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित मान कर चलना सही नहीं है, विशेषकर तब जब कोरोना के तमाम तरह के नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं।
कई वेरिएंट्स से खतरा
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर क्रिस्टीना डॉल्ड कहती हैं, इस अध्ययन में हमने एसिम्टोमेटिक और सिम्टोमेटिक, दोनों तरह के लोगों पर शोध कर संक्रमण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज के बारे में जानने की कोशिश की। अध्ययन के निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि ये एंटीबॉडीज कोरोना के अल्फा और बीटा वेरिएंट्स से मुकाबले के लिए पर्याप्त नहीं पाई गई हैं। ऐसे में यह मान कर चलना कि जिन लोगों को एक बार संक्रमण हो गया है, उन्हें दोबारा इसका खतरा नहीं है, यह गलत है।
एंटीबॉडीज कितनी असरदार?
क्रिस्टीना डॉल्ड कहती हैं, कोविड -19 के बाद बनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं, एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। इतना ही नहीं एसिम्टोमेटिक और सिम्टोमेटिक रूप से संक्रमित रह चुके कई लोगों में छह महीने बाद तक एंटीबॉडीज नहीं देखी गई हैं। सिम्टोमेटिक रूप से संक्रमण का शिकार रह चुके अधिकांश लोगों में छह महीने बाद तक औसत दर्जे की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जबकि अधिकांश एसिम्टोमेटिक संक्रमित रह चुके लोगों में इतनी भी प्रतिरक्षा नहीं पाई गई। ऐसे में दोबारा संक्रमण होने के खतरे को नकारा नहीं जा सकता है।
वैक्सीनेशन कराना सभी के लिए जरूरी
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया है कि लोगों को सिर्फ इसी आधार पर स्वयं को सुरक्षित मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह एक बार पहले संक्रमित हो चुके हैं। सभी लोगों को कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीनेशन जरूर करना चाहिए, क्योंकि यही एक उपाय है जो आपको सुरक्षित रख सकता है।
इस अध्ययन के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों के उस दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित रह चुके लोगों को 90 दिनों बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए। गौरतलब है कि भारत में भी इसी तरह के नियम का पालन किया जा रहा है।
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नोट: यह लेख ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन की प्री-प्रिंट रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
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