दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के एकबार फिर से बढ़ते मामले स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। वैक्सीनेशन की दो डोज को संक्रमण से सुरक्षा देने में काफी असरदार बताया जा रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि देश की केवल 4 फीसदी आबादी को ही अब तक दोनों खुराक मिल पाई हैं। कई स्थानों पर वैक्सीनेशन की लगातार कमी बनी हुई है जिसके कारण पहली डोज ले चुके लोग अब भी दूसरी डोज के लिए इंतजार कर रहे हैं। वैक्सीनेशन के बूस्टर डोज की कमी के बीच हालिया अध्ययन ने लोगों को बड़ी उम्मीद दी है।
अध्ययन: कोरोना से मुकाबले में इस वैक्सीन की सिंगल डोज भी काफी, भारत में भी उपलब्ध हैं इसके टीके
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्पुतनिक-वी की सिंगल डोज भी असरदार
अब तक के अध्ययनों में वैज्ञानिक बताते रहे हैं कि वेक्टर वैक्सीन स्पुतनिक-वी की दो खुराक कोरोना संक्रमण के खिलाफ 92 प्रतिशत तक कारगर साबित हो सकती है। हालांकि हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों को सिंगल डोज के बाद भी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के कई क्षेत्रों में सीमित वैक्सीन आपूर्ति और असमान वैक्सीन वितरण की समस्या बनी हुई है, ऐसे देशों के लिए स्पुतनिक-वी वैक्सीन काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
सिंगल डोज भी कोरोना से सुरक्षा देने में प्रभावी
अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने अर्जेंटीना के 289 स्वास्थ्य कर्मियों पर स्पुतनिक-वी के एक और दो शॉट्स के प्रभावों की तुलना की। शोधकर्ताओं ने बिना किसी पूर्व संक्रमण वाले प्रतिभागियों में दूसरी खुराक के तीन सप्ताह बाद वायरस-विशिष्ट इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजीजी) एंटीबॉडी मिलने की पुष्टि की। वहीं पहली डोज लेने के तीन सप्ताह के भीतर इनमें से 94 प्रतिशत प्रतिभागियों के भीतर आईजीजी विकसित हो गई थी। 90 फीसदी लोगों में सिंगल डोज के बाद ही न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडीज के बारे में पता चला। इस आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि वैक्सीन की सिंगल डोज भी कोरोना से सुरक्षा देने में प्रभावी साबित हो सकती है।
न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडीज के बारे में क्या पता चला?
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि जो लोग पहले से कोरोना से संक्रमित रह चुके थे उनमें स्पुतनिक-वी की दूसरी डोज लेने के बाद भी न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडीज के उत्पादन में खास वृद्धि नहीं हुई। अध्ययन की प्रमुख लेखक एंड्रिया गामार्निक कहती हैं, इस अध्ययन में हमने पाया कि स्पुतनिक-वी की एक खुराक भी लोगों (विशेष रूप से पहले से संक्रमित रह चुके) में मजबूत प्रतिरक्षा उत्पन्न कर सकती है। जो देश लगातार वैक्सीन की समस्या का सामना कर रहे हैं वह अपने लोगों को स्पुतनिक-वी की एक डोज देकर भी संक्रमण की रफ्तार को काबू करने का प्रयास कर सकते हैं।
वैक्सीन की कमी वाले देशों के लिए राहत
शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की अवधि के मूल्यांकन और एंटीबॉडी का स्तर के बारे में जानने के लिए और विस्तार से अध्ययन करने की आवश्यकता है। अध्ययनकर्ता कहते हैं, सिंगल डोज से बनी एंटीबॉडीज भी काफी सुरक्षात्मक हो सकती है। ऐसे में जिन देशों में वैक्सीन की कमी है वह दूसरी डोज में देरी करके ज्यादा से ज्यादा लोगों को फिलहाल सिंगल डोज देने की भी योजना बना सकते हैं।
-------------
स्रोत और संदर्भ:
Sputnik V Vaccine Elicits Seroconversion and Neutralizing Capacity to SARS CoV-2 after a Single Dose
अस्वीकरण नोट: यह लेख सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।