Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
सोते-सोते अगर आपको भी बेचैनी हो जाती है, सांस नहीं ले पाते हैं, तो ये खबर आपके लिए है। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें ये समस्या है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में करीब एक अरब लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। यह बेहद ही गंभीर बीमारी है, जिसमें सांस न ले पाने की वजह से जान जाने का खतरा रहता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बीमारी के शिकार लोग हृदय और सांस संबंधी कई बीमारियों और टाइप-2 डायबिटीज के शिकार हो सकते हैं। नींद में सांस न लेने या सांस उखड़ने की इस बीमारी को 'स्लीप एपनिया' कहा जाता है। अमेरिका में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, वहां हर साल 30 हजार से अधिक लोगों की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है। अगर 'स्लीप एपनिया' गंभीर स्थिति में है, तो इसके शिकार लोगों की 18 साल की उम्र के अंदर ही मौत हो जाने की संभावना अधिक होती है।
सावधान: क्या आपको भी है सोते समय सांस न ले पाने की समस्या? तो जान लें इसके खतरे
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जानलेवा हो सकती है सांस उखड़ने की समस्या
- विशेषज्ञ कहते हैं कि सोते समय सांस लेने में उतार-चढ़ाव होता रहता है। जब सोने के बाद गले की मांसपेशियां आराम की मुद्रा में रहती हैं और सिकुड़ जाती हैं, तो सांस रुकने लगती है। अगर ज्यादा समय तक सांस उखड़ जाए तो यह जानलेवा हो सकती है।
स्लीप एपनिया के लक्षण क्या हैं?
- सोते समय खर्राटे आना
- नींद में बहुत कोशिश के बाद सांस आना
- बार-बार नींद में हांफना
- खर्राटों से सांस का टूटना
- हांफते हुए नींद से उठना
- रात में पसीना आना
- बार-बार पेशाब आना
ऐसे लोगों को है ज्यादा खतरा
- मोटापा या ज्यादा वजन वाले लोग
- 40 से ज्यादा उम्र के लोग
- नींद की गोली लेने वाले लोग
- धूम्रपान करने वाले लोग
- शराब पीने वाले लोग
- विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बीमारी का खुद से पता लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि व्यक्ति सोया हुआ होता है। नींद में सांस न ले पाने की समस्या का पता सिर्फ वही व्यक्ति लगा सकता है, जो आपके बगल में सोता हो। इसका पता किसी की सोते वक्त निगरानी करके लगाया जा सकता है। यह समस्या बार-बार होने पर डॉक्टर से मिलने में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।