लॉन्ग सिटिंग या सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से सेहत के लिए गंभीर दुष्प्रभावों वाला मानते रहे हैं। अध्ययनकर्ता बताते हैं, जिन लोगों के दिन का अधिकतर समय बैठे-बैठे बीतता है या शारीरिक तौर पर कम सक्रिय रहते हैं, उनके अन्य लोगों की तुलना में मोटापा का शिकार होने का जोखिम अधिक हो सकता है, और मोटापा को हृदय रोग-डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। पर इसके जोखिम यहीं तक सीमित नहीं हैं, सेंडेंटरी लाइफस्टाइल आपके मस्तिष्क की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।
Study: ज्यादा बैठना सिर्फ मोटापा-हृदय रोग ही नहीं बढ़ाता, कम उम्र में डिमेंशिया रोगी जैसा हो सकता है मस्तिक
ज्यादा देर तक बैठने के नुकसान
ज्यादा देर तक बैठे रहने की आदत किस प्रकार से शरीर के लिए हानिकारक दुष्प्रभावों वाली हो सकती है, इस बारे में समझने के लिए वैज्ञानिकों ने दो समान समूहों की तुलना की गई थी। इसमें ट्रांजिट ड्राइवर, जो दिन के अधिकांश समय बैठ रहते हैं और कंडक्टर या गार्ड जिनका काम ज्यादातर खड़े रहने वाला होता है, इनपर अध्ययन किया गया। इन लोगों के स्वास्थ्य पर किए गए आकलन में पाया गया कि ड्राइवर्स में हृदय रोग और अन्य क्रोनिक बीमारियां होने आशंका लगभग दोगुनी थी। ब्रेन हेल्थ पर भी इसके दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
मस्तिष्क हो सकता है समय से पहले बूढ़ा
मस्तिष्क के लिए ज्यादा देर बैठना कितना घातक है, इस बारे में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया ऐसे लोगों के मस्तिष्क की इमेजिंग बिल्कुल डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति जैसी देखी गई। ज्यादा देर तक बैठने से हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल का खतरा भी बढ़ जाता है, ये सभी स्थितियां भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती रही हैं। वहीं जो लोग शारीरिक तौर पर अधिक सक्रिय थे उनमें इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम पाया गया, ऐसे लोगों का मस्तिष्क भी स्वस्थ था।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण होने वाले जोखिमों को कैसे कम किया जा सकता है, इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित व्यायाम की आदत आपके लिए काफी लाभकारी है। ज्यादातर अध्ययन दिन में कम से कम 30-45 मिनट के व्यायाम की सलाह देते हैं, पर अगर हफ्ते में सिर्फ 4-5 घंटे भी व्यायाम कर लेते हैं तो ये ब्रेन को स्वस्थ रखने के साथ इसके कारण होने वाली अन्य जटिलताओं से बचाने में भी आपके लिए मददगार हो सकती है।
शारीरिक सक्रियता बढ़ाना सभी के लिए जरूरी
अगर आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं तो ये शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के फिटनेस को ठीक रखने और समय के साथ बढ़ती क्रोनिक बीमारियों के जोखिमों से सुरक्षा देने में भी लाभकारी है। मोटापे को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए गंभीर समस्याकारक स्थिति के तौर पर देखते हैं, शारीरिक निष्क्रियता इस जोखिम को और बढ़ा देती है। मसलन, अगर सिर्फ इसी एक आदत में सुधार कर लिया जाए तो कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम करने में इससे मदद मिल सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Possible link between sitting for long periods and reduced thickness of a brain region
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