Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं, जिनके बारे में लोगों को कम ही पता है। ऐसी ही एक बीमारी है एंडोमीट्रियोसिस। यह बीमारी आमतौर पर महिलाओं को होती है, पुरुषों में इसके मामले दुर्लभ हैं, लेकिन यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में महिलाओं में भी जानकारी का अभाव है, जबकि कुछ साल पहले 'एंडोमीट्रियोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया' ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि भारत में करीब ढाई करोड़ महिलाएं इससे पीड़ित हैं। दरअसल, इस बीमारी में गर्भाशय के आस-पास की कोशिकाएं और ऊतक (टिश्यू) शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाते हैं। ये अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, यूरीनरी ब्लैडर में या पेट के अंदर किसी भी जगह पर फैल सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिसमें मरीज शारीरिक और मानसिक तौर पर टूट जाता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षणों के बारे में और इससे किन महिलाओं को अधिक खतरा होता है?
एंडोमीट्रियोसिस: महिलाओं में ये बीमारी हो सकती है खतरनाक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
एंडोमीट्रियोसिस बीमारी के लक्षण क्या हैं?
- थकान, चिड़चिड़ापन, कमजोरी
- अनियमित मासिक धर्म
- मासिक धर्म के दौरान असामान्य रूप से ज्यादा ब्लीडिंग और दर्द
- मासिक धर्म शुरू होने से कुछ दिन पहले स्तनों में सूजन और दर्द
- यूरिन इंफेक्शन
- पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द
- शारीरिक संबंध बनाने के दौरान और बाद में दर्द
किन महिलाओं को इस बीमारी का ज्यादा खतरा और किन्हें कम?
- आमतौर पर यह बीमारी किशोर और युवा महिलाओं में देखने को मिलती है, यानी इन्हें इस बीमारी का ज्यादा खतरा होता है। वहीं, जिन महिलाओं का मासिक धर्म बंद हो चुका होता है, उनमें एंडोमीट्रियोसिस होने की संभावना बेहद ही कम होती है।
मां बनने से रोक सकती है यह बीमारी
- एंडोमीट्रियोसिस की वजह से गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है। इससे जूझ रही महिलाओं के मां बनने की संभावना काफी कम हो जाती है। हालांकि हल्के से सामान्य एंडोमीट्रियोसिस के मामले में महिलाओं को गर्भधारण करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।
- विशेषज्ञ बताते हैं कि एंडोमीट्रियोसिस बीमारी अगर शुरुआती चरण में है तो अल्ट्रासाउंड से इसका पता लगाया जा सकता है, लेकिन अगर मामला गंभीर हो तो लेप्रोस्कोपी की मदद लेनी पड़ती है। इस बीमारी के कारणों के बारे में तो पता नहीं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि मासिक धर्म के दौरान दर्द और यूरिन इंफेक्शन जैसी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा साफ-सफाई और डाइट पर भी खास ध्यान देना चाहिए।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
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