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Monsoon Diet: मानसून में दही खाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान, वरना हो सकता है नुकसानदायक

Fri, 11 Jul 2025 08:13 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 11 Jul 2025 08:13 PM IST
सार

बारिश आते ही दही खाने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल आते हैं। इस मौसम में दही खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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Should you eat curd in monsoon or not Know its effect on health during rainy season
curd - फोटो : Adobe stock

बारिश के मौसम में नमी और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हमारे पाचन और इम्यूनिटी का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। दही, जो भारतीय भोजन का एक अभिन्न हिस्सा है, अपने प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों के कारण पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।



हालांकि मानसून में दही का सेवन करते समय थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। इस मौसम की बढ़ी हुई नमी के कारण दही जल्दी खट्टा हो सकता है, जिससे सर्दी-जुकाम, एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यदि इसे सही तरीके से न खाया जाए, तो इसके फायदे नुकसान में बदल सकते हैं। इसलिए, यह जानना महत्वपूर्ण है कि बारिश के दौरान दही का सेवन कैसे करें? आइए इस लेख में जानते हैं कि मानसून में दही खाते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

Should you eat curd in monsoon or not Know its effect on health during rainy season
दही खाने के फायदे - फोटो : freepik

ताजा दही ही खाएं
मानसून में हमेशा ताजा दही खाएं, क्योंकि नमी के कारण दही में बैक्टीरिया या फंगस आसानी से पनप सकते हैं। बासी या खट्टा दही खाने से पेट में जलन, दस्त या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। ताजा दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और पाचन को सुचारू करता है। दही को हमेशा फ्रिज में स्टोर करें। घर का दही जमाएं, क्योंकि इसमें आर्टिफिशियल तत्व नहीं होते हैं। 


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Should you eat curd in monsoon or not Know its effect on health during rainy season
साइनस में दही का सेवन बढ़ा सकता है तकलीफ - फोटो : freepik

सर्दी-जुकाम में दही से परहेज
जिन लोगों को मानसून में सर्दी-जुकाम या कफ की समस्या है, उन्हें दही खाने से बचना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, दही शरीर में कफ बढ़ा सकता है, जो सर्दी, खांसी या गले की खराश को और गंभीर कर सकता है। नमी और ठंडे मौसम में दही का ठंडा प्रभाव शरीर में बलगम बढ़ा सकता है। अगर आपको सर्दी-जुकाम के लक्षण हैं, तो दही के बजाय गर्म सूप या हर्बल चाय लें।


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दही - फोटो : इंस्टाग्राम

अत्यधिक दही से बचें
वैसे तो दही का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन मानसून में अगर अधिक मात्रा में दही खा लिया जाए तो, यह पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। अत्यधिक दही खाने से पेट में गैस, सूजन या अपच हो सकती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए हानिकारक है जिनका पाचन तंत्र कमजोर है। दिन में 100-150 ग्राम दही पर्याप्त है। इसे दोपहर में खाएं, जब पाचन तंत्र सबसे सक्रिय होता है। दही को रायता, लस्सी या स्मूदी के रूप में सीमित मात्रा में लें।

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डॉक्टर - फोटो : Freepik.com
एलर्जी और चिकित्सीय सलाह
अगर आपको दही खाने से एलर्जी है, जैसे त्वचा पर चकत्ते, खुजली या पेट दर्द होता है, तो इसका सेवन तुरंत बंद करें और चिकित्सक से परामर्श लें। कुछ लोगों में लैक्टोज असहिष्णुता के कारण दही पचाना मुश्किल हो सकता है। मानसून में ताजा, घर का बना दही चुनें और प्रोसेस्ड या फ्लेवर्ड दही से बचें। अगर आपको डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो डॉक्टर की सलाह लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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