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Health Tips: सावधान! बदलते मौसम के साथ दस्तक दे सकती हैं ये बीमारियां, ऐसे रखें खुद का ख्याल

Wed, 11 Feb 2026 06:51 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 11 Feb 2026 06:51 PM IST
सार

Health Tips For Seasonal Change: मौसम धीरे-धीरे बदल रहा है, अब दिन के समय में ऊनी कपड़े पहनने पर शरीर में बैचेनी महसूस हो रही है। हालांकि रात में अभी भी तापमान कम रहता है। देखा जाए तो ऐसे मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही से वायरल इंफेक्शन हो सकता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।

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Seasonal Change Health Risks: How to Protect Yourself from Viral and Bacterial Infections
इम्युनिटी - फोटो : Freepik.com

Boosting Immunity Naturally: ठंड का मौसम अब धीरे-धीरे जा रहा है। मौसम में बदलाव आते ही हमारे चारों ओर के वातावरण में सूक्ष्मजीवों और वायरस की सक्रियता तेजी से बढ़ जाती है। दरअसल वातारवरण में तापमान का बार-बार कम-अधिक होना बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ सकती है, जिससे सर्दी-जुकाम, फ्लू, वायरल बुखार और डेंगू-मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 



अक्सर लोग बदलते मौसम में ठंडी चीजों का सेवन या अचानक गर्म कपड़े छोड़ने जैसी गलतियां करते हैं, जो शरीर को बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देती हैं। संक्रामक बीमारियां न केवल श्वसन तंत्र को प्रभावित करती हैं, बल्कि ये पाचन और त्वचा संबंधी समस्याओं का भी कारण बनती हैं। इसलिए, इस 'ट्रांजिशन पीरियड' में सतर्कता बरतना और अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करना न केवल आपको सुरक्षित रखता है, बल्कि संक्रमण की चैन को तोड़ने में भी मदद करता है।

Seasonal Change Health Risks: How to Protect Yourself from Viral and Bacterial Infections
इम्युनिटी - फोटो : Freepik.com

वायरल इन्फेक्शन का जोखिम
बदलते मौसम में सबसे पहले हमारा श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। हवा में मौजूद परागकण और धूल के कण एलर्जिक राइनाइटिस और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इन्फ्लुएंजा जैसे वायरस इस समय तेजी से फैलते हैं, जिससे गले में खराश, खांसी और तेज बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। अगर आप भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाते हैं, तो मास्क का उपयोग और हाथों की स्वच्छता इन संक्रामक बूंदों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।


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Seasonal Change Health Risks: How to Protect Yourself from Viral and Bacterial Infections
क्यों मच्छर कुछ लोगों को ज्यादा काटते हैं? - फोटो : Adobe Stock

मच्छर जनित बीमारियां और जल-जनित खतरा
तापमान में बदलाव और रुक-रुक कर होने वाली बारिश मच्छरों के प्रजनन के लिए 'ब्रीडिंग ग्राउंड' तैयार करती है। इस दौरान डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं। इसके साथ ही, दूषित पानी और भोजन के कारण टाइफाइड, पीलिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस का जोखिम बढ़ने लगता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और हमेशा उबालकर या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं ताकि जल-जनित जीवाणुओं से बचाव हो सके।


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Seasonal Change Health Risks: How to Protect Yourself from Viral and Bacterial Infections
इम्युनिटी बढ़ाने के तरीके - फोटो : freepik.com

कमजोर इम्युनिटी
हमारी इम्युनिटी शरीर की पहली रक्षा पंक्ति है, लेकिन अनियमित खान-पान और नींद की कमी इसे कमजोर कर देती है। बदलते मौसम में विटामिन-C, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, संतरा, अदरक और तुलसी का सेवन जरूर करें। शरीर को अंदर से मजबूत रखने के लिए कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें और तनाव कम करें। अगर इम्युनिटी मजबूत होगी, तो संक्रमण होने पर भी शरीर उससे तेजी से रिकवर कर पाएगा।

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Seasonal Change Health Risks: How to Protect Yourself from Viral and Bacterial Infections
डॉक्टर - फोटो : Freepik

सतर्कता और सावधानी ही असली सुरक्षा
बदलते मौसम में बीमारियों से बचने का सबसे सरल उपाय सावधानी है। अपने पहनावे का ध्यान रखें, अचानक बहुत ठंडे या बहुत गर्म वातावरण में जाने से बचें और संतुलित आहार लें। अगर बुखार, शरीर में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। आपकी थोड़ी सी जागरूकता न केवल आपको बल्कि आपके परिवार को भी संक्रामक बीमारियों के चंगुल से सुरक्षित रख सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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