आप अपने शरीर के बारे में कितना जानते हैं? शायद उतना ही जितना किताबों में अब तक पढ़ा या सुना हो। शरीर के भीतर फेफड़े, किडनी, गुर्दे, लिवर जैसे अंग और कोशिका, डीएनए जैसी कुछ वैज्ञानिक सी चीजें। आपने आंत में गुड बैक्टीरिया के बारे में भी सुना होगा, जो भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, पर क्या आप आंत में वायरस के बारे में जानते हैं? एक-दो नहीं कई हजारों वायरस। हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इंसानों की आंत में ऐसे 54 हजार से ज्यादा वायरस होने की बात कही है। खास बात यह है कि इनमें से 92 फीसदी वायरस के बारे में वैज्ञानिक भी अनजान हैं। है ना काफी रोचक, तो आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
अध्ययन: इंसानों के आंत में हो सकते हैं 54 हजार से ज्यादा 'फ्रेंडली वायरस', 92 फीसदी के बारे में वैज्ञानिक भी अनजान
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आंतों में हो सकते हैं हजारों वायरस
नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि आंत में पाए जाने वाले यह वायरस स्वाभाव से 'बैक्टीरिया-खोर' होते हैं, यानी कि आंतों में मौजूद बैक्टीरिया ही इनका आहार हैं, लेकिन मानव कोशिकाओं पर न तो यह हमला हमला करते हैं, न हीं उन्हें कोई नुकसान पहुंचाते हैं। दूसरी भाषा में इन्हें 'पालतू वायरस' कहा जा सकता है। कोविड-19 के इस दौर में वायरस शब्द सुनते ही डर सा लग जाता है। वायरस का नाम सुनते ही हमारा ध्यान सहसा उन सूक्ष्म जीवों की ओर चला जाता है जो स्वाभिवक रूप से शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। हालांकि हमारे शरीर में, विशेषकर पेट में पाए जाने वाले यह वायरस इससे बिल्कुल अलग हैं।
आंतों में मौजूद बैक्टीरिया
अब तक हम आंतों के भीतर मौजूद गुड बैक्टीरिया के बारे में पढ़ते और सुनते आए हैं। आंतों में मौजूद यह बैक्टीरिया भोजन को पचाने में हमारी मदद करने के अलावा कई अन्य प्रकार से भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह बैक्टीरिया रोगजनक बैक्टीरिया से हमारी रक्षा भी करते हैं। अब इस नए अध्ययन में ऐसे ही वायरसों के बारे में भी पता चला है जो शरीर में तो मौजूद होते हैं, पर नुकसान नहीं पहुंचाते। क्या इनकी भी कई प्रजातियां हो सकती हैं, आइए आगे जानते हैं?
मानव मल के सैंपल से चला इन वायरस का पता
मानव मल में कितने प्रकार के वायरस हो सकते हैं, इस बात का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने 24 अलग-अलग देशों से मानव मल के 11,810 सैंपल एकत्रित किए। इसके अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने मेटागेनोमिक गट वायरस कैटलॉग बनाया, जो अबतक इस तरह का सबसे बड़ा डेटा है। इस कैटलॉग में वायरस के 189,680 जीनोम के बारे में पता चला, जिसे
54,000 से अधिक वायरस की प्रजातियों में विभाजित किया जा सकता है। खास बात यह है कि इन वायरस की 90 फीसदी से ज्यादा की प्रजातियां अब कर वैज्ञानिकों के लिए अनजान हैं। वे सामूहिक रूप से 450,000 से अधिक अलग-अलग प्रोटीन को एनकोड करती हैं।
भौगोलिक रूप से वायरस की प्रजातियों में हो सकती है भिन्नता
वैज्ञानिकों ने बताया कि अध्ययन के दौरान हमने विभिन्न वायरस की उप-प्रजातियों का भी पता लगाया है। इनमें से कुछ के भौगोलिक पैटर्न अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए हमें क्रैस्फेज की एक उप-प्रजाति के अध्ययन के दौरान पता चला कि यह एशिया में तो पाई जाती हैं लेकिन यूरोप और उत्तरी अमेरिका के नमूनों में इनकी उपस्थिति दुर्लभ या अनुपस्थित थी। मतलब, जरूर नहीं है कि वायरस सभी जगह पर एक ही प्रकार के हों। यह अध्ययन अपने आप में काफी रोचक है, उम्मीद है इस बारे में और विस्तार से अध्ययन के दौरान कुछ और रहस्यमयी चीजें सामने आ सकती हैं।
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स्रोत और संदर्भ:
Metagenomic compendium of 189,680 DNA viruses from the human gut microbiome
अस्वीकरण नोट: यह लेख नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। शरीर में वायरस के बारे में विस्तार से जानने के लिए किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।