अपने अभिनय से लोगों के दिलों में राज करने वाले ऋषि कपूर अब हमारे बीच नहीं हैं। 30 अप्रैल की सुबह उनका निधन हो गया। दो साल से वह कैंसर से जूझ रहे थे। अमेरिका के न्यूयॉर्क में करीब एक साल तक रह कर उन्होंने अपना बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाया और देश लौटे। खबरों के मुताबिक उनकी मौत ल्यूकीमिया के कारण हुई। उनमें मल्टीपल माइलोमा के भी लक्षण थे। यह एक तरह का ब्लड कैंसर है जो बोन मैरो में पनपता है। मल्टीपल माइलोमा या बोन मैरो कैंसर का खतरा आमतौर पर सामान्य से अधिक वजन वाले लोगों को होता है। खासकर 50 की उम्र के बाद इसका खतरा अधिक रहता है। आइए, जानते हैं इन बीमारियों के बारे में विस्तार से।
क्या आप जानते हैं कि बोन मैरो क्या होता है?
बोन मैरो हमारी हड्डियों के अंदर एक ऐसा हिस्सा होता है, जिसमें इम्यून सेल्स समेत शरीर की ज्यादातर कोशिकाएं बनती है। बोन मैरो मुलायम ऊतकों के रूप में होता है और हमारे ब्लड में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के रूप में शामिल होते हैं।
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ऋषि कपूर
- फोटो : अमर उजाला
ऋषि कपूर को भूख न लगने की भी शिकायत थी। ऐसा मल्टीपल माइलोमा की स्थिति में भी होता है। माइलोमा एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिका होती हैं, जो बोन मैरो में पाई जाती हैं। खबरों के मुताबिक ऋषि कपूर की मृत्यु ल्यूकीमिया के कारण हुई है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में असामान्य तरीके से श्वेत रक्त कोशिकाओं का उत्पादन होता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एके केजरीवाल के मुताबिक, इस स्थिति में व्यक्ति का शरीर संक्रमण से नहीं लड़ पाता है। इसके साथ ही शरीर की हड्डियों में दर्द रहता है। कैंसर के कारण भी हड्डियां कमजोर हो जाती है।
माइलोमा सेल्स का कुछ हिस्सा जब कैंसर का रूप धारण कर लेता है और लगातार बढ़ने लगता है तो इसे मल्टीपल माइलोमा या बोन मैरो में पनपने वाला ब्लड कैंसर कहा जाता है। यह हड्डियों को खोखला बनाने के साथ ही धीरे-धीरे व्यक्ति की किडनी और पाचनतंत्र को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। मल्टीपल माइलोमा का इलाज दवाओं के अलावा कीमोथेरपी, कोर्टिकोस्टेरोइड, रेडिएशन और स्टेम सेल प्लेसमेंट के जरिए भी किया जाता है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत
शरीर में जब मल्टीपल माइलोमा फैलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधी क्षमता तेजी से कम होने लगती है। इस समस्या के इलाज और कैंसर की बढ़ती कोशिकाओं को खत्म करने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज के शरीर में स्टेम सेल्स का प्रत्यारोपण किया जाता है, जो कि नई रक्त कोशिकाएं बनाती है और प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाती है। शरीर की हड्डियों के अंदर पाया जानेवाला बोन मैरो को स्वस्थ रखे बिना शरीर को स्वस्थ रखना नामुमकिन है। इसके संक्रमित होने की स्थिति में ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।