क्या आप जानते हैं कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से लिंक होते हैं? यानी कि अगर आपको मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कोई विकार है तो इसके कारण शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं। इस तरह की स्थिति को साइकोसोमेटिक कहा जाता है। साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर, वह मनोवैज्ञानिक स्थितियां होती हैं जिसमें शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का निदान ही नहीं हो पाता है, इनके लक्षणों को अक्सर शारीरिक समस्या मान लिया जाता है।
Psychosomatic: मानसिक स्वास्थ्य विकारों के शारीरिक लक्षणों की समस्या, सिर-पेट दर्द के लक्षणों से न हों कंफ्यूज
शरीर पर कैसे होता है इसका असर?
साइकोसोमेटिक विकार, शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इस तरह के लक्षण लंबे समय से बने हैं और सामान्य उपचार से लाभ नहीं मिल रहा है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले ले।
- थकान-अनिद्रा
- मांसपेशियों में दर्द या पीठ दर्द।
- उच्च रक्तचाप की समस्या।
- सांस लेने में तकलीफ (डिस्पनिया, या सांस की तकलीफ)।
- अपच, अक्सर पेट खराब रहना।
- सिरदर्द और माइग्रेन।
- नपुंसकता की समस्या
- पेट के अल्सर (पेप्टिक अल्सर डिजीज)।
बनी रह सकती है ब्लड प्रेशर की दिक्कत
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण आपको ब्लड प्रेशर बढ़ने की दिक्कत हो सकती है। तनाव में होने पर शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन हो सकता है। ऐसे में इन हार्मोन्स के कारण हृदय तेजी से धड़कता है और रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं। ये स्थितियां ब्लड प्रेशर बढ़ा देती हैं। हालांकि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि तनाव की समस्या, लंबे समय तक उच्च रक्तचाप का कारण बनती है हालांकि स्ट्रेस-एंग्जाइटी में ब्लड प्रेशर बढ़ना सामान्य है।
माइग्रेन हो सकता है मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का लक्षण
यदि आपको अक्सर माइग्रेन की समस्या रहती है, तो इसे साइकोसोमेटिक विकारों का संकेत माना जा सकता है। शोधकर्ता बताते हैं कि डिप्रेशन के शिकार वाले लोगों में माइग्रेन होने की आशंका तीन गुना, वहीं जिन लोगों को माइग्रेन है उनके अवसादग्रस्त होने का खतरा पांच गुना अधिक हो सकता है।
पाचन में गड़बड़ी के लक्षण
जब हम तनावग्रस्त होते हैं, तो शरीर में हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर का रिलीज बढ़ सकता है। यह आंत के कार्यों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है, जिसके कारण आपको पाचन स्वास्थ्य में गड़बड़ी से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा अध्ययनों में पाया गया है कि तनाव की स्थिति हमारे आंत में गुड बैक्टीरिया के संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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