दीपावली के त्योहार के बाद राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से स्मॉग ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। दिवाली के बाद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक "गंभीर" श्रेणी में पहुंच गया है, जिसे सेहत के लिए गंभीर समस्याओं का कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पटाखों पर लगे प्रतिबंध का लोगों ने उल्लंघन किया जिसके चलते राष्ट्रीय राजधानी जहरीले धुंध की चादर से घिर गई है। दिल्ली के कई हिस्सों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की कॉसंट्रेशन 999 प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई। पीएम 2.5 के इस स्तर को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहद खतरनाक मान रहे हैं।
प्रदूषित दिल्ली: जहरीली हुई आबोहवा, जानिए क्या होता है पीएम 2.5, किन अंगों के लिए है बेहद खतरनाक?
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क्या होता है पीएम 2.5?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम 2.5, प्रदूषक कणों की उस श्रेणी को संदर्भित करता है जिसका आकार 2.5 माइक्रोन के करीब का होता है। मुख्य रूप से जंगल की आग, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं के कारण इसका स्तर बढ़ जाता है। पीएम 2.5 के बढ़ने के कारण धुंध छाने और साफ न दिखाई देने के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कण आसानी से सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके गले में खराश, जलन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दिल्ली के हालात हुए है बेहद खतरनाक
सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक दिल्ली में 4 नवंबर के बाद से पीएम 2.5 प्रदूषकों के स्तर में 38 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ऐसे वातावरण में रहने वाले लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण दुनियाभर में 42 लाख से अधिक लोगों की जान गई थी।
विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता
साल 2010 में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि कुछ घंटों से लेकर हफ्तों तक ही पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों से संबंधित रोग के कारण होने वाली मृत्यु दर बढ़ सकती है। सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, बुजुर्गों और शिशुओं पर इसका अधिक गंभीर प्रभाव पड़ता है। पीएम 2.5 के संपर्क में आने से आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होना सामान्य है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम 2.5 के बढ़े हुए स्तर के संपर्क में रहने के कारण आंख, नाक, गले, फेफड़े और हृदय को गंभीर खतरा हो सकता है। आंखों में जलन, आंखों से पानी आना, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और त्वचा से संबंधित समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। पीएम 2.5 से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को बाहर जाते समय अच्छे और कसे हुए मास्क पहनने के साथ आंखों पर चश्मा लगाकर रखना चाहिए। समय-समय पर चेहरे को अच्छी तरह से पानी से धोते रहें।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।