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सेहत को खतरा: प्रदूषण ने बिगाड़ी दिल्ली की आबोहवा, विशेषज्ञों ने यातायात प्रदूषण के जोखिमों को लेकर चेताया

Thu, 27 Oct 2022 03:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 27 Oct 2022 03:08 PM IST
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वायु प्रदूषण का बढ़ता खतरा - फोटो : istock

पिछले कई वर्षों की तरह दीपावली के बाद इस साल भी राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य शहर गंभीर वायुप्रदूषण की चपेट में हैं। दीपावली के बाद राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 तक पहुंच गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 101 से 150 के एक्यूआई को अस्वस्थ, 150-200 को रोगकारक, 201-300 को खराब और 300 से अधिक को बहुत खराब-घातक वायु की श्रेणी में रखा गया है। जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा एक्यूआई है, इस तरह की हवा में सांस लेने से कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का जोखिम हो सकता है। पटाखों के धुएं को मौजूदा वायु प्रदूषण के लिए प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। 



दीपावली के कुछ दिन पहले से ही दिल्ली की आबोहवा बगड़ती देखी जा रही है। दिवाली से एक दिन पहले रविवार को राजधानी का एक्यूआई "खराब" श्रेणी में 266 दर्ज किया गया था। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब वाली श्रेणी में है। पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का बढ़ना कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को विशेष सावधानी और सर्तकता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

आइए जानते हैं कि दिल्ली की खराब होती वायु गुणवत्ता सेहत के लिए कितनी गंभीर है और इससे बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए? एक हालिया अध्ययन में यातायात प्रदूषण के जोखिमों को लेकर भी वैज्ञानिकों ने सचेत किया है।

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वायु प्रदूषण से सेहत को गंभीर नुकसान का खतरा - फोटो : Istock

खराब वायु गुणवत्ता हो सकती है जानलेवा

खराब वायु गुणवत्ता के सेहत पर होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसे बेहद खतरनाक पाया है। यूरोपीय एनवायरमेंटल एजेंसी (ईईए) के शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में फेफड़ों, हृदय से संबंधित कई तरह की गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।

वायु प्रदूषण के अल्पकालिक और लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, श्वसन संक्रमण और गंभीर स्थितियों में फेफड़ों के कैंसर तक का खतरा हो सकता है। सभी लोगों को प्रदूषण से बचने के उपाय करते रहने की आवश्यकता है।

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यातायात प्रदूषण के नुकसान - फोटो : Pixabay

यातायात प्रदूषण से डेमेंशिया का खतरा

शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को लेकर अलर्ट किया है। न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि यातायात से जुड़े प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वालों में डेमेंशिया रोग विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि विशेषतौर पर PM2.5 के कारण कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों के बारे में पता चलता है, इससे डेमेंशिया का जोखिम भी देखा गया है। 

वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, लंदन में प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक एहसान अबोलहासानी कहते हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट से पता चला है कि दुनिया की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी वायु प्रदूषण के अनुशंसित स्तर से अधिक वाले क्षेत्रों में रह रही है। हमारे परिणाम बताते हैं कि इस तरह का वातावरण लोगों में डेमेंशिया जैसे गंभीर रोगों के खतरे को बढ़ा रहा है।

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वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानिए - फोटो : istock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानने के लिए हमने मुंबई में वरिष्ठ श्वसन रोग विशेष डॉ विनीत चावला से संपर्क किया। डॉ विनीत कहते हैं, अक्तूबर-नवंबर के महीनों में पिछले कई वर्षों से महानगरों में वायु की गुणवत्ता को बिगड़ते हुए देखा जाता रहा है। 150 से अधिक की एक्यूआई में लंबे समय तक रहने वालों में कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। इसे सिर्फ सांस की बीमारियों तक ही सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, खराब हवा न्यूरोलॉजिकल, हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को भी बढ़ा देती है। ऐसे वातावरण से बचाव करते रहना बहुत आवश्यक है।

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वायु प्रदूषण से हृदय को नुकसान - फोटो : istock

कई गंभीर क्रोनिक बीमारियों का हो सकता है जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती के लिए गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसके कारण डेमेंशिया से लेकर बच्चों में मस्तिष्क की संरचना में बदलाव, दिल के दौरे पड़ने और कैंसर तक का जोखिम बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि वायु प्रदूषण का औसत से अधिक स्तर हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम 17 प्रतिशत और अन्य गंभीर बीमारियों के कारण मौत के खतरे को 20 फीसदी तक बढ़ा देती है। गर्भवती का इस प्रकार के हवा के संपर्क में रहना भ्रूण की सेहत को लेकर भी चुनौती कारक हो सकता है। 

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