बच्चों की मौत का कारण बनने वाली बीमारियों में निमोनिया बड़ा और अहम कारण है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में तो यह सबसे प्रमुख कारण है। जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में निमोनिया से होने वाली बच्चों की मृत्यु दर 14.3 फीसदी है। यानी कि देश में हर चार मिनट में एक बच्चे की मौत हो रही है। हालिया रिपोर्ट में ये जानकारियां सामने आई है। आइए, जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या है:
इस बीमारी से देश में हर चार मिनट में होती है एक बच्चे की मौत, जानें इसके लक्षण और बचाव
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'सेव द चिल्ड्रन' संस्था ने 'भारत में निमोनिया के परिस्थिति का विश्लेषण' के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड और राजस्थान पर आधारित एक अध्ययन किया। अध्ययन के बाद जारी रिपोर्ट में बताया गया कि देश में हर चार मिनट में एक बच्चे की मौत निमोनिया से हो रही है। इन पांच राज्यों में कुल मिलाकर एआरआई यानी एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन का प्रचलन दर 13.4 फीसदी रहा।
इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार की स्थिति सबसे बदतर है, जबकि राजस्थान की स्थिति अपेक्षाकृत कम खराब है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि बचपन में होने वाले निमोनिया के लिए घर में वायु प्रदूषण जोखिम का एक महत्वपूर्ण कारक है।
| राज्य | एआरआई दर |
| बिहार | 18.2 फीसदी |
| उत्तर प्रदेश | 15.9 फीसदी |
| झारखंड | 12.8 फीसदी |
| मध्य प्रदेश | 11.6 फीसदी |
| राजस्थान | 8.4 फीसदी |
क्या है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़े में संक्रमण हो जाता है। फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार या जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों को इससे खतरा अधिक होता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया वायरस या फंगस से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों में चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों से इसकी आशंका बढ़ जाती है।
ऐसे होती है निमोनिया की जांच
निमोनिया विषाणु और जीवाणु दोनों से होता है। इसके लिए खून, बलगम और एक्सरे सहित कई जांचे कराई जाती हैं। आमतौर पर चिकित्सक निमोनिया के लक्षण दिखने पर स्टेथोस्कोप से बच्चे के फेफड़े की जांच करते हैं। इसमें हृदय गति और सांस की गति की भी जांच की जाती है। एक्सरे से फेफड़े की स्थिति देखकर भी निमोनिया की जानकारी मिल जाती है।
- बच्चा दूध पीना छोड़ दे
- अंगुली या होंठ नीला दिखे या सुस्त हो जाए तो चिकित्सक के पास ले जाएं
- उल्टी, दस्त होने, पेट फूलने या सांस तेज चलना
- तलवे व हथेली पीली पड़ना भी निमोनिया का संकेत है
- सप्ताहभर तक सर्दी जुकाम बना रहे, खांसी केसाथ सीने में दर्द, बुखार और सांस लेने में दिक्कत हो