कोरोना संक्रमण से इस समय दुनिया के 210 से ज्यादा देश जूझ रहे हैं। दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। लेकिन जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती, तबतक इसे रोकने के लिए तमाम एहतियात बरते जाने की अपील की जा रही है। वहीं शासन, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों की बदौलत कोरोना के मरीज तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने 310 शहरों के अध्ययन के बाद कोरोना से जंग के लिए भारत की दो जगहों से सीख लेने की बात कही है। इस शोध अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए छोटे-छोटे इलाकों पर ध्यान देना होगा।
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कोरोना लॉकडाउन के दौरान एक रिक्शाचालक(File Photo)
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और पूर्वोत्तर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने कहा है कि ओडिशा के गंजाम और महाराष्ट्र के धारावी में हजारों की संख्या में संक्रमित थे, लेकिन अब 200 से भी कम मरीज हैं। कोरोना से जारी जंग में इन दोनों जगहों से रणनीति सीखी जा सकती है। मालूम हो कि मुंबई के धारावी मॉडल की तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा विश्व बैंक ने भी की है।
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घनी आबादी वाले इलाकों में कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैला(File Photo)
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टीम ने अध्ययन में पाया कि छोटे और घनी आबादी वाले इलाकों में कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैला। गांवों की तुलना में शहरों में ज्यादा लोगों के संक्रमित होने के पीछे भी छोटे जगहों पर घनी आबादी ही है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर छोटे पॉकेट को ही चिह्नित कर संक्रमण रोक लिया जाए तो कोविड को बड़े पैमाने पर फैलने से रोका जा सकता है।
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मुंबई के धारावी में बनाए जा रहे पृथकवास केंद्र में काम करता मजदूर(File Photo)
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महामारी विशेषज्ञ डॉ.मोरिज क्रैमर का कहना है कि मैड्रिड और लंदन जैसे शहरों पर महामारी की मार इसलिए ज्यादा पड़ी, क्योंकि ये सघन आबादी वाले इलाके थे। यहां तुरंत ध्यान नहीं दिया जा सका और छोटे कार्यक्रमों में भी लोग संक्रमित होते चले गए। उनका कहना है कि प्रत्येक शहर और घर के लिए कोई एक मॉडल नहीं हो सकता, लेकिन स्क्रीनिंग के उपाय एक जैसे हो सकते हैं।
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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गंजाम: संक्रमण थामने का सफल मॉडल
- ओडिशा के गंजाम जिले में दो मई को कोरोना का पहला केस मिला। अगस्त में कोरोना मरीज मिलने की दर 59 फीसदी तक पहुंच गई। इसके बाद प्रबंधन के तहत उपाय शुरू हुए तो अब 20 हजार 430 मरीजों में से 98 फीसदी पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और केवल 188 मरीज बचे हैं। (आंकड़े शोध अध्ययन होने तक के हैं।)