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चिंताजनक: इस देश में एक तिहाई से अधिक युवा गंभीर मानसिक रोगों से पीड़ित, सामने आईं हैरान कर देनी वाली वजहें

Thu, 19 Sep 2024 07:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 19 Sep 2024 07:06 PM IST
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one in three young people in Singapore reports very poor mental health know Mental health issues in India
मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : freepik.com

शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं, इनमें से एक में भी गड़बड़ी का असर दूसरी सेहत पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं दुनियभार में तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं।



विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर हम लोग शरीर को स्वस्थ रखने के उपाय तो कर लेते हैं, पर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते। यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि कई मानसिक बीमारियों को गंभीर शारीरिक रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है।

इसी बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इसके अनुसार सिंगापुर में एक तिहाई से अधिक युवा आबादी खराब मानसिक स्वास्थ्य का सामना कर रही है। गुरुवार को जारी युवा मानसिक स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के अनुसार, देश के एक तिहाई युवाओं ने अवसाद, चिंता या तनाव के गंभीर या बहुत गंभीर लक्षणों का अनुभव करने की बात स्वीकारी है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये काफी चिंताजनक विषय है। तनाव-अवसाद के गंभीर लक्षण कई मामलों में खतरनाक हो जाते हैं, जिसपर समय रहते ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

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युवाओं में मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : istock

क्या है इसकी वजह?

सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 15 से 35 वर्ष की आयु के हर तीन में से एक युवा (30.6 प्रतिशत) ने बताया कि वे चिंता और तनाव जैसे मानसिक रोगों से बहुत परेशान हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (आईएमएच) द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन युवाओं की साइबर बुलिंग हुई, जिनका रोज सोशल मीडिया पर तीन घंटे से अधिक समय बीतता है या फिर जो लोग अपनी शरीर की बनावट या किसी शारीरिक समस्या से परेशान हैं उनमें लक्षण और भी अधिक देखे गए हैं। 

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मेंटल हेल्थ - फोटो : istock

क्या कहती हैं अध्ययकर्ता?

साल 2022 में सिंगापुर में 15-35 वर्ष की आयु के बीच मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करने के लिए ये शोध शुरू किया गया था, जिसके चौंकाने वाले रिपोर्ट देखे गए हैं। 

आईएमएच मेडिकल बोर्ड की सदस्य और अध्ययन की प्रमुख लेखक प्रोफेसर स्वप्ना वर्मा कहती हैं, पिछली पीढ़ियों की तुलना में आज के युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ कई अन्य जटिलताओं के अधिक शिकार देखे जा रहे हैं। सोशल मीडिया उनमें लगातार तुलना करने वाली सोच भरता जा रहा है, जिससे शरीर की बनावट जैसे मोटापा, कद, रंग, बालों की दिक्कत को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। इसका मन पर नकारात्मक असर होता है।

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अवसाद के बढ़ते मामले - फोटो : Pexel

भारत में भी बढ़ रहा है खतरा

गौरतलब है कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम सिंगापुर तक ही सीमित नहीं है, दुनिया के कई देश इस चुनौती का सामना कर रहे हैं। भारत में भी इसका जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भारत में भी एक बड़ी चिंता का विषय हैं, जो हर सात में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। भारत में 2016 के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, हर 20 में से एक व्यक्ति अवसाद से पीड़ित पाया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, भारत की लगभग 18.1% वयस्क आबादी या 40 मिलियन लोग चिंता विकारों से प्रभावित हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य विकारों पर दें ध्यान - फोटो : istock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, पिछले एक दशक में ये समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं, कोरोना के बाद इसमें और तेजी आई है। समय के साथ लोगों का आपसी मेल-जोल कम होना, वर्चुअल दुनिया को हकीकत मानना, सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल इसका कारण माने जा रहे हैं। गरीबी और सामाजिक-आर्थिक असमानताएं इन विकारों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सबसे चिंताजनक बात ये है कि बड़ी संख्या में लोग तो ऐसे हैं जिन्हें वर्षों से मानसिक विकार होगा पर कभी निदान ही नहीं हो पाया। जिन्हें पता भी है उनमें से भी कई लोग सामाजिक कलंक के भाव से इलाज नहीं ले रहे हैं। एनसीआरबी के डेटा बताते हैं कि देश में आत्महत्या के मामले भी बढ़ गए हैं, ये खराब मानसिक स्वास्थ्य का ही परिणाम है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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