डायबिटीज को लेकर पहले यह धारणा हुआ करती थी कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है और न ही इसे पहले से नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अचानक से किसी भी व्यक्ति को डायबिटीज नहीं होता है। कोई भी व्यक्ति पहले प्री- डायबिटीज की अवस्था से गुजरता है तब ही उसे डायबिटीज होता है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिसिन के एक शोध में यह बात छपी थी कि भारत में 2018 में भारत के 14 प्रतिशत लोग प्री डायबिटीज अवस्था के शिकार थे, अब तो यह संख्या और भी बढ़ चुकी होगी। अगली स्लाइड्स से जानिए प्री डायबिटीज से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें।
प्री डायबिटीक अवस्था में इस तरह रोका जा सकता है डायबिटीज को, लंबे समय तक नहीं बढ़ेगी शुगर
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क्या होता है प्री डायबिटीज
हावर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर प्री डायबिटीज के विषय में यह कहती हैं कि यह शरीर की एक ऐसी अवस्था है जब किसी व्यक्ति का शरीर ग्लूकोज को आसानी से ऊर्जा में नहीं बदल पाता है। ऐसा होने पर शुगर का स्तर बढ़ जाता है लेकिन यह स्तर उतना नहीं बढ़ता कि इसे डायबिटीज की संज्ञा दी जा सके।
किस तरह डायबिटीज होता है नियंत्रित
यदि प्री डायबिटीज के दौरान वजन को पांच से सात फीसदी कम कर लिया जाए और खानपान को सुधार लिया जाए तो डायबिटीज से बिल्कुल बचा जा सकता है। प्री डायबिटीक मरीज को सप्ताह में कम से कम ढाई घंटा व्यायाम करना चाहिए और भोजन में सब्जी, फल, हेल्दी फैट आदि को शामिल करना चाहिए। पूरी तरह से दिनचर्या को व्यवस्थित बनाना चाहिए।
लौ- कैलोरी डाइट का सेवन
जिन लोगों को प्री-डायबिटीज है, उन्हें सबसे पहले लौ- कैलोरी डाइट का अनुसरण करना चाहिए। इंग्लैंड में हुए एक अध्ययन के अनुसार, ऐसे मरीजों को दो से पांच महीने तक 625 से 850 कैलोरी वाली लिक्विड डाइट लेने को कहा गया जिसके बाद उन्हें सामान्य डाइट दी गई। अध्ययन में पाया गया कि 50 प्रतिशत लोगों का शुगर लेवल एक महीने तक नहीं बढ़ा।
रिवर्स हो जाता है डायबिटीज
मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की फिजिशयन डॉ मोनीक टेला के अनुसार पिछले 20 सालों की मेडिकल रिसर्च यह स्पष्ट करती है कि यदि डायबिटीज नया है तो सिर्फ हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से इसे रिवर्स करवा सकते हैं। परंतु एक बार यह पूर्णरूप से हो गया फिर तो यह हमेशा का साथी बन जाता है। यदि आप नहीं चाहते हैं कि आपको डायबिटीज हो तो बहुत जरूरी है कि अपनी प्री-डायबिटीक अवस्था को पहचानें और चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित जीवनशैली अपनाएं।