भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में ओमिक्रॉन संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। भारत में देखते-देखते कोरोना के इस बेहद संक्रामक वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या 400 के आंकड़े को पार कर गई है। ओमिक्रॉन के इस तेजी से बढ़ते रफ्तार को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन का संक्रमण उन लोगों में भी देखने को मिल रहा है जिनका पूरी तरह से वैक्सीनेशन हो चुका है। वहीं विदेशों से बूस्टर डोज ले चुके लोग भी इस संक्रमण से सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कोरोना के इस गंभीर खतरे से बचाव कैसे किया जाए?
संकट: डेल्टा से आगे निकल सकता है ओमिक्रॉन, कम्युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर महामारी विशेषज्ञ ने दी यह जानकारी
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डेल्टा से तेज बढ़ रहा है ओमिक्रॉन
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक डेल्टा की तुलना में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट काफी तेजी से बढ़ रहा है। दुनियाभर में अब तक कोरोना का यह वैरिएंट करीब 108 देशों में फैल चुका है जहां बहुत ही कम समय में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को यह अपना शिकार बना चुका है। भारत में भी कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़े ही तेज रफ्तार के साथ बढ़ता जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश में ओमिक्रॉन के कम्युनिटी ट्रॉंसमिशन की शुरुआत हो चुकी है।
क्या कहते हैं महामारी विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना बताते हैं, ओमिक्रॉन के अब तक सामने आए मामलों में से 70 फीसदी लोगों ने हाल-फिलहाल विदेशों की यात्रा की है, इनमें संक्रमण की पुष्टि होने को सामान्य माना जा सकता है। हालांकि 30 फीसदी ऐसे लोगों में भी ओमिक्रॉन का संक्रमण सामने आया है जिनकी न तो कोई ट्रैवेल हिस्ट्री है और न ही वह किसी बाहर से लौटे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इस वैरिएंट का कम्युनिटी ट्रॉंसमिशन देश में शुरू हो चुका है।
क्या तीसरी लहर की तरफ बढ़ रहा है देश?
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि जिस तरह से देश में ओमिक्रॉन की रफ्तार देखी जा रही है, ऐसे में आशंका है कि फरवरी तक कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। इस बारे में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक कहते हैं, कई सारे मैथमेटिकल टर्म्स के आधार पर संक्रमण के पीक को लेकर दावे किए जाते रहे हैं, हालांकि इसके साथ संक्रमण की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता है। अगर हम लगातार बचाव के उपाय करते रहे तो इस तरह के खतरे से बचाव किया जा सकता है।
बचाव सभी के लिए है जरूरी
डॉ दीपक कहते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है कि ओमिक्रॉन काफी अधिक संक्रामक है, ऐसे में इससे बचाव के लिए भी हमें अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सबसे पहले वैक्सीन की दोनों डोज और फिर मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड हाइजीन, अगर इन चार बातों का ध्यान रखा जाए तो ओमिक्रॉन से सुरक्षित रहा जा सकता है। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना होगा कि बचाव ही हमारे पास एकमात्र तरीका है।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।