पिछले करीब दो महीने से दुनियाभर में जारी कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कई उपभेद वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। ओमिक्रॉन बीए.2, ऐसा ही एक सब-वैरिएंट है जिसको लेकर वैज्ञानिक काफी चिंतित हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट का यह उपभेद, जिसे 'स्टेल्थ ओमिक्रॉन' भी कहा जा रहा है, वह मूल वैरिएंट से काफी अधिक संक्रामक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें मूल स्ट्रेन की तुलना में अधिक म्यूटेशन हैं, जो इसकी संक्रामकता दर को बढ़ा देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के इस खतरे को लेकर सभी को विशेष अलर्ट रहना चाहिए। यह अचानक से स्थिति को बिगाड़ सकता है।
Omicron BA.2: कोविड टेस्ट को चकमा दे रहा है यह सब-वैरिएंट, संक्रमित होने पर भी निगेटिव आ सकती है रिपोर्ट, जानिए बचाव के लिए क्या करें?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में भी बीए.2 के कारण बिगड़े हालात
भारत के संदर्भ में बात करें तो वैज्ञानिकों का मानना है कि ओमिक्रॉन बीए.2 के कारण यहां कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि हुई है, वहीं वैश्विक स्तर पर अब तक 54 देशों में इस नए सब-वारिएंट का पता लगाया गया है। डेनमार्क इस सब-वैरिएंट से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है। डेनमार्क के स्टेटन्स सीरम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि देश में ओमिक्रॉन से संक्रमित ज्यादातर लोगों में बीए.2 सब-वैरिएंट की पहचान की जा रही है। हमारे लिए सबसे अधिक चिंताजनक बात इसको ट्रैक करना है।
टेस्ट को कैसे चकमा दे रहा है बीए.2 उपभेद?
यूकेएचएसए के वैज्ञानिकों के मुताबिक ओमिक्रॉन बीए.2 में वह एक म्यूटेशन नहीं है जो कोविड-19 का पता लगाने में मदद करता है। ओमिक्रॉन के "एस" स्पाइक जीन में एक आनुवंशिक विलोपन देखा जा रहा था जिसकी मदद से आरटी-पीसीआर परीक्षण के साथ संक्रमण की पुष्टि कर पाना आसान होता था, हालांकि बीए.2 सब-वैरिएंट में वह एस जीन नहीं है, इस वजह से इसे ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आशंका है कि लोगों में संक्रमण होने के बावजूद उनका परीक्षण रिपोर्ट निगेटिव आ सकता है।
टेस्ट निगेटिव आ जाने पर क्या करें?
वैज्ञानिकों के मुताबिक चूंकि इस सब-वैरिएंट का पता लगा पाना कठिन हो सकता है, ऐसे में सभी लोगों को व्यक्तिगत तौर पर इस खतरे को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। अमेरिका के महामारी विज्ञानी फहीम यूनुस ने एक रिपोर्ट में बताया कि ओमिक्रॉन के लक्षणों को बिल्कुल हल्के में लेने की गलती न करें। गले में खराश या बुखार होने पर तत्काल परीक्षण कराएं। यदि लक्षण के बाद भी आपका रिपोर्ट नकारात्मक आ जाता है, तो अगले 24 से 48 घंटों में फिर से परीक्षण कराया जा सकता है। रैपिड एंटीजन टेस्ट की बजाय, आरटी-पीसीआर टेस्ट के माध्यम से इसका पता लगाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
अमर उजाला से बातचीत में इंटरनल मेडिसिन के वरिष्ठ चिकित्सर डॉ विक्रमजीत सिंह बताते है, चूंकि अभी कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के साथ बीए.2 जैसे सब-वैरिएंट के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में इस खतरे को देखते हुए सभी लोगों को विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। यदि आपका कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ जाता है, फिर भी लक्षण बरकरार हैं तो सुरक्षात्मक तौर पर होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करें। भारत में कोविड रोगियों के लिए, होम-आइसोलेशन की अवधि को 10 दिनों के बजाय 7 दिनों कर दिया गया है, फिर भी जब तक आपमें लक्षण बने रहते हैं, खुद को आइसोलेशन में ही रखना बेहतर माना जा सकता है। लगातार डॉक्टर की संपर्क में रहें और बताए गए उपायों का पालन करते रहें।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।