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WHO की चेतावनी: कोरोना के साथ बढ़ रहा है 'एक और महामारी' का खतरा, भारत सहित यूरोपीय देशों के आंकड़े चिंताजनक

Fri, 13 May 2022 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 13 May 2022 02:05 PM IST
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obesity epidemic according to who, why obesity leads to big problem
एक और बड़ी समस्या की ओर संकेत - फोटो : iStock

पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र कोरोना महामारी से निपटने में लगा हुआ है। कोरोना वायरस के तमाम वैरिएंट्स ने लोगों की सेहत के बुरी तरह से प्रभावित किया है, हालांकि इस समय दुनियाभर के लिए कोरोना ही अकेला खतरा नहीं है, कई और स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। कुछ तो इतनी तेजी से बढ़ रही हैं जिसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक और महामारी का अलर्ट जारी कर दिया है।



डब्ल्यूएचओ ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि यूरोपीय देशों में मोटापे का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2016 में यूरोपीय देशों के 59 फीसदी से अधिक वयस्कों का बॉडी-मास इंडेक्स (बीएमआई) सामान्य से अधिक था। कोरोना महामारी के दौरान इसमें और भी बढ़ोतरी आने के संकेत है। तेजी से बढ़ता वजन कई तरह के गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारक माना जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन अधिक होने के कारण सेहत से संबंधित कई तरह की समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसे डायबिटीज, हृदय रोगों सहित कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता रहा है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर मोटापा बढ़ने की स्थिति के बारे में पता चलता है, वह निश्चित ही बड़ी चिंता का कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी देशों को इस बढ़ते खतरे पर नियंत्रण पाने को लेकर योजना बनाने की आवश्यकता है, वरना यह एक बड़ी महामारी का रूप ले सकती है। 

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बढ़ते मोटापे को लेकर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट - फोटो : iStock

डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 2016 में यूरोप में 59% वयस्कों का बॉडी-मास इंडेक्स (बीएमआई) औसत से अधिक था। रिपोर्ट के अनुसार तुर्की और यूनाइटेड किंगडम सहित अधिकांश यूरोपीय देशों में लोगों में अधिक वजन की समस्या देखी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार मोटापा के कारण हर साल दो लाख से अधिक कैंसर के मामलों का निदान किया जा रहा है। इसके अलावा मोटापा जनित तमाम रोगों के कारण हर साल 1.2 मिलियन से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। 

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बच्चों में मोटापे का जोखिम - फोटो : iStock

मोटापे की दर 'घातक' स्तर पर

वैश्विक स्तर पर मिल रहे डेटा के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने चिंता जताते हुए कहा है कि अधिक वजन और मोटापे की दर 'घातक' स्तर पर पहुंच गई थी और इसमें लगातार बढ़ोतरी जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कोई भी देश फिलहाल 2025 तक डब्ल्यूएचओ ग्लोबल नॉनकम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) के तहत मोटापे की रोकथाम को लेकर बनाए गए लक्ष्य को पूरा करने की राह पर नहीं दिखता है। यूरोपीय देशों में स्कूल जाने वाला हर 3 में से एक बच्चा मोटापे का शिकार है, यह भविष्य के लिए बड़ी चुनौतियों का संकेत है।

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मोटापे के कारण बढ़ती समस्याएं - फोटो : iStock

कैंसर के खतरे को लेकर चेतावनी 

अध्ययनों की मानें तो मोटापा, कई गंभीर बीमारियों जैसे मस्कुलोस्केलेटल जटिलताएं, टाइप-2 मधुमेह, हृदय रोग और करीब 13 प्रकार के कैंसर का कारक माना जाता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी  का बढ़ना समय से पहले मृत्यु और विकलांगता के लिए भी एक प्रमुख जोखिम कारक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से मोटापे की दर बढ़ती जा रही है, ऐसे में अंदेशा है कि यह  धूम्रपान जनित कैंसर से भी आगे निकल जाएगी। तुर्की और माल्टा के साथ ब्रिटेन में मोटापा ग्रस्त लोगों की संख्या सबसे अधिक है। 

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हाई बीएमआई कई तरह के नुकसानदायक - फोटो : Pixabay

बीएमआई का अधिक होना हानिकारक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापा, शरीर का वजन बहुत अधिक होने की स्थिति को परिभाषित करता है। 25 से 29.9 के बीच की बीएमआई को अधिक वजन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि 30 या उससे अधिक को मोटापा माना जाता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान बिगड़ी जीवनशैली और खान-पान की आदत ने मोटापे की समस्या को काफी हद तक बढ़ा दिया है। शोध में ऐसे लोगों में कोविड-19 का जोखिम भी अधिक पाया गया है।

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