कोरोना वायरस पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनियाभर के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। हालिया अध्ययनों में वैज्ञानिक कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को सबसे संक्रामक और घातक बताते रहे हैं। इसी बीच हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने कोरोना के एक नए वैरिएंट के बारे में सूचित किया है, इसे डेल्टा से भी खतरनाक बताया जा रहा है। कोरोना के इस नए वैरिएंट (सी.1.2) को वैज्ञानिक दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बता रहे हैं। भारत के संदर्भ में भी वैज्ञानिकों ने इससे गंभीर खतरे को लेकर आगाह किया है।
नई मुसीबत: सामने आया डेल्टा से भी खतरनाक कोरोना का नया वैरिएंट, इस वजह से भारत की बढ़ गई है चिंता
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काफी खतरनाक माना जा रहा है यह नया वैरिएंट
वैज्ञानिकों का कहना कि अब तक पूरी दुनिया डेल्टा वैरिएंट से खतरे को लेकर परेशान थी, इस बीच इस नए वैरिएंट ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि यह नया वैरिएंट शरीर में वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से मात दे सकता है। ऐसे एक बार फिर सभी लोगों के लिए कोरोना का खतरा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इस वैरिएंट के बारे में विस्तार से जानते हैं।
तेजी से अपना रूप बदल सकता है कोरोना का यह वैरिएंट
कोरोना के इस नए वैरिएंट को म्यूटेशन के लिहाजे से भी वैज्ञानिक बेहद खतरनाक बता रहे हैं। 24 अगस्त को प्रीप्रिंट रिपोजिटरी मेडरेक्सिव पर पीयर-रिव्यू अध्ययन के लिए पोस्ट किए गए डेटा के अनुसार सी.1 की तुलना में कोरोना के इस नए वैरिएंट सी.1.2 में तेजी से म्यूटेशन हो सकता है। इसका मतलब यह है कि कोरोना के इस नए वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में काफी तेजी से बदलाव होता रह सकता है।
यह भी बड़ी चुनौती
शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनियाभर में अब तक सामने आ चुके कोरोना के सभी वैरिएंट्स की तुलना में यह नया वैरिएंट अधिक उत्परिवर्तन है। यही इस वैरिएंट को ज्यादा खतरनाक बना देता है। चूंकि इसमें अधिक म्यूटेशन होने के बारे में पता चल रहा है, इस आधार पर वैज्ञानिक इससे बचाव के तरीकों को भी काफी कठिन मान रहे हैं।
प्रतिरक्षा प्रणाली चकमा देने की क्षमता
कोरोना के इस नए वैरिएंट को लेकर शोधकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वैरिएंट शरीर में संक्रमण या वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी चकमा दे सकता है। शोधकर्ता बताते हैं, सार्स-सीओवी-2 वायरस अपने स्पाइक प्रोटीन का उपयोग करके मानव कोशिकाओं को संक्रमित करते हुए उनमें प्रवेश करता है।