Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
साइटिका एक सामान्य, लेकिन बहुत ही गंभीर समस्या है। दरअसल, कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है, जिसे साइटिका कहा जाता है। 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या आम है। इसके अलावा अधिक मेहनत करने वाले या भारी वजन उठाने वाले लोगों में भी यह समस्या अधिकतर देखने को मिलती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि साइटिका में पैरों में तेज झनझनाहट होती है और पैर के अंगूठे और अंगुलियां सुन्न हो जाती हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे पैर बिल्कुल निर्जीव हो जाता है, यानी उसमें जान ही नहीं रहती। अगर यह समस्या लगातार बढ़ती रहे, तो यह शरीर के आंतरिक नसों पर भी बुरा प्रभाव डालना शुरू कर देती है। इसलिए साइटिका के लक्षणों को समय रहते पहचानने और सही इलाज कराने की जरूरत होती है, ताकि बीमारी गंभीर रूप न ले।
सावधान: क्या आपको भी अक्सर कमर से लेकर पैरों तक होता है तेज दर्द? हो सकती है साइटिका की समस्या
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साइटिका के लक्षण क्या हैं?
- कमर में धीरे-धीरे दर्द का बढ़ना
- पैर के पीछे के भाग में दर्द महसूस होना
- बैठने पर पैर के पीछे के भाग में दर्द का बढ़ जाना
- कूल्हों में दर्द
- पैरों में जलन या झुनझुनी महसूस होना
- पैर के पिछले हिस्से में एक तरफ दर्द होना
- उठते-बैठते वक्त पैरों में तेज दर्द महसूस होना
साइटिका का कारण क्या है?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि साइटिका की समस्या आमतौर पर तब होती है, जब तंत्रिकाओं में सूखापन आ जाता है और साथ ही रीढ़ की हड्डी भी खिसकने लगती है। अगर रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार की चोट लगी है, तो भी साइटिका होने की संभावना बढ़ जाती है।
साइटिका से बचाव के उपाय क्या हैं?
- साइटिका की समस्या न हो, इसके लिए कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं। इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें, पीठ को सीधा करके सही मुद्रा में बैठने की कोशिश करें और साथ ही सही तरीके से सोएं, इसके लिए अच्छे गद्दे का चयन करें, जिसपर आप आराम से पीठ सीधा करके सो सकें।
साइटिका होने के बाद क्या सावधानी बरतें?
- भारी चीजें उठाने से बचें
- अचानक से नीचे न झुकें
- उठते, बैठते और लेटते वक्त शरीर की मुद्रा सही रखें
- असामान्य रास्तों पर चलने से बचें
- महिलाएं ऊंची हील वाली सैंडल पहनने से बचें
- अधिक समस्या होने पर डॉक्टर से मिलें
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।