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Neeraj Chopra: क्या होती है ग्रोइन स्ट्रेन की समस्या जिससे परेशान रहे नीरज चोपड़ा? विशेषज्ञ से समझिए

Fri, 09 Aug 2024 02:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 09 Aug 2024 02:34 PM IST
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नीरज चोपड़ा को ग्रोइन इंजरी - फोटो : PTI

पेरिस ओलंपिक 2024 में नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया है, वह लगातार दो ओलंपिक में मेडल जीतने वाले भारत के पहले ट्रैक और फील्ड एथलीट बन गए हैं। 26 वर्षीय भाला फेंक खिलाड़ी ने पेरिस ओलंपि में 89.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया। नीरज के माता-पिता ने बेटे की उपलब्धि पर कहा, हम बहुत खुश हैं। हमारे लिए, रजत भी स्वर्ण के बराबर है।



इन सबके बीच पदक हासिल करने के बाद नीरज ने मीडिया से बातचीत में कहा, मैच के दौरान मेरे दिमाग में लगातार ये बना हुआ था कि कहीं फिर से इंजरी न हो जाए। 60 फीसदी दिमाग इसी में लगा हुआ है। असली थ्रो तभी होता है जब आपके दिमाग से ये डर निकल जाए। ग्रोइन इंजरी ने मुझे बहुत परेशान किया है। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही इस डर को भी मैं मात दे पाऊंगा और देश के लिए और बेहतर प्रदर्शन करूंगा। 

गौरतलब है कि वह ग्रोइन की समस्या के साथ मुकाबले में हिस्सा ले रहे थे, जिसके कारण संभवत: उनके लिए पूरी शारीरिक शक्ति के साथ प्रदर्शन कर पाना कठिन था। आइए फिटनेस विशेषज्ञ आखिर क्या होती है ये ग्रोइन इंजरी? 

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मांसपेशियों में स्ट्रेन की समस्या (सांकेतिक) - फोटो : istock

क्या होती है ग्रोइन इंजरी?

अमर उजाला से बातचीत में फिटनेस एक्सपर्ट और फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी ने बताया ग्रोइन इंजरी या ग्रोइन स्ट्रेन जांघों के शीर्ष हिस्से में मांसपेशियों के समूह को प्रभावित करती है। ग्रोइन वह हिस्सा होता है जहां पेट का निचला हिस्सा और जननांग के आसपास जांघों की मांसपेशियां मिलती हैं।

खिलाड़ियों में ग्रोइन की समस्या होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है, ये काफी दर्दकारक हो सकती है। नीरज इसी हिस्से में स्ट्रेन की समस्या के शिकार हैं।

हमारी मांसपेशियां हजारों छोटे-छोटे रेशों से बनी होती हैं जो आपस में बुने होते हैं। ये रेशे आपस में खिंचते और दबते रहते हैं जो आपके शरीर को हिलने-डुलने में मदद करते हैं। अगर किसी मांसपेशी का जरूरत से ज्यादा या अधिक दबाव के साथ इस्तेमाल हो रहा हो तो इसमें खिंचाव आ जाता है और इनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। 

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पैरों में दर्द की समस्या - फोटो : freepik.com

खिलाड़ियों में इस तरह की समस्या का खतरा

नीरज के मामले में, चूंकि जैवलिन फेंकते समय आखिरी के चरणों में ग्रोइन और एडक्टर मांसपेशियों पर दबाव काफी अधिक हो जाता है, ऐसे में इसमें चोट लगने और फटने का खतरा अधिक हो सकता है। 

यहां जानना जरूरी है कि ग्रोइन हिस्से में होने वाली किसी भी तरह की चोट या समस्या के कारण अपने पैर या कूल्हे को हिलाने में भी कठिनाई होने लगती है। मांसपेशियों में सूजन और ऐंठन बने रहने के कारण दैनिक कार्यों को करने में भी कठिनाई हो सकती है। इंजरी की गंभीर स्थिति में सर्जरी की भी आवश्यकता होती है। 

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फिजियोथेरेपी - फोटो : freepik.com

नीरज को एडक्टर की भी रही है दिक्कत

ग्रोइन में समस्या के साथ-साथ नीरज एडक्टर स्ट्रेन को लेकर भी लंबे समय से परेशान रहे हैं। एडक्टर स्ट्रेन की ही समस्या के कारण नीरज चोपड़ा ने ओस्ट्रावा गोल्डन स्पाइक 2024 में हिस्सा न लेने का फैसला किया था। एडक्टर स्ट्रेन, एथलीटों में ग्रोइन इंजरी और दर्द का एक आम कारण है। फुटबॉल, सॉकर, हॉकी, बास्केटबॉल वाले खिलाड़ियों में ये समस्या होना काफी आम देखा जाता रहा है। 
 



साइड-टू-साइड मोशन वाली स्थिति में अतिरिक्त दबाव के कारण हिप एडक्टर की चोटें अधिक देखी जाती रही हैं।


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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