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पिछले एक दशक में जिन बीमारियों के मामले सबसे ज्यादा बढ़ते हुए देखे गए हैं, डायबिटीज उनमें से एक है। डायबिटीज एक क्रोनिक बीमारी है, जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में लगभग 422 मिलियन लोग इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या के शिकार है, हर साल इसके रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। चिंताजनक बात यह भी है कि जिन लोगों डायबिटीज की समस्या होती है उनमें कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 14 नवंबर को 'वर्ल्ड डायबिटीज डे' मनाया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज से बचाव के लिए सही जानकारियों के साथ समय पर निदान और इलाज बहुत आवश्यक होता है। हालांकि गलत जानकारियों के कारण लोगों में तमाम तरह के भ्रम देखने को मिलते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ खाने से लेकर परहेज करने तक, जागरूकता की कमी के कारण लोग कई बार इस बीमारी में गलतियां कर जाते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही कुछ मिथ के बारे में जानते हैं, जिन्हें ज्यादातर लोग सच मानते हैं।
World diabetes day 2021: डायबिटीज से जुड़े इन मिथ को कहीं आप भी तो नहीं मानते आ रहे हैं सच? जान लीजिए क्या है हकीकत
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मिथ: डायबिटीज रोगियों को कार्ब्स का सेवन नहीं करना चाहिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कार्ब्स के सेवन को लेकर डायबिटीज रोगी अक्सर भ्रमित रहते हैं। कुछ लोग चावल, आलू जैसी चीजों से बिल्कुल दूरी बना लेते हैं। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि शरीर के लिए कार्ब्स का सेवन भी आवश्यक है, हालांकि डायबिटीज के मामले में इसकी मात्रा और कार्ब्स के प्रकार को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। कार्ब्स से बिल्कुल दूरी बना लेना सेहत के लिए ठीक नहीं है।
मिथ: डायबिटीज सिर्फ बुजुर्गों को होता है, बच्चों और युवाओं को इससे खतरा नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज कोई उम्र आधारित बीमारी नहीं है। जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी के कारण हाल के वर्षों में कम उम्र के लोगों, यहां तक कि बच्चों में भी इसके मामले देखे गए हैं। टाइप-1 डायबिटीज आमतौर पर बच्चों में देखा जाता है वहीं टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में बढ़ता देखा गया है। इस रोग से सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।
मिथ: एक समय भोजन न करके डायबिटीज कंट्रोल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज रोगियों को अपने भोजन के समय और अंतराल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। रोगियों में एक और गलत धारणा यह है कि यदि वे एक समय भोजन नहीं करते हैं, तो इससे शुगर लेवल नियंत्रित हो जाएगा। हालांकि असलियत यह है कि भोजन छोड़ने से शुगर के स्तर का और तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। डायबिटीज रोगियों को छोटे-छोटे अंतराल पर हल्के आहार लेते रहने चाहिए।
मिथ: इंसुलिन लेने का मतलब डायबिटीज बहुत गंभीर है और ठीक नहीं हो सकता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर लोगों में यह भ्रम देखा गया है कि जो लोग इंसुलिन ले रहे हैं, उनका डायबिटीज आखिरी चरणों मतलब बहुत ही गंभीर स्थिति में है। यह जरूर है कि शरीर द्वारा सही से इंसुलिन के निर्माण न कर पाने की स्थिति में इंसुलिन की सुई दी जाती है, लेकिन इसका मतलब आखिरी चरण से बिल्कुल नहीं है। सुई के माध्यम से इंसुलिन के स्तर को ठीक बनाए रखने के साथ अन्य जटिलताओं को रोकने का प्रयास होता है।