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चिंताजनक: दुनियाभर में हर तीसरे बच्चे में देखी जा रही है ये गंभीर बीमारी, एशियाई देशों में खतरा सबसे ज्यादा

Sat, 28 Sep 2024 07:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 28 Sep 2024 07:17 PM IST
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myopia in children study says One in three children short-sighted worldwide
eye Health - फोटो : istock

आंखों की बीमारियां हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। बच्चों में भी ये खतरा बढ़ता जा रहा है। आपने भी अपने आस-पास कई बच्चों की आंखों पर नजर का चश्मा लगा देखा होगा। आंखों की रोशनी कमजोर होने की दिक्कत क्वालिटी ऑफ लाइफ को भी प्रभावित करती है। बच्चों में आंखों की एक बढ़ती बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है। 



वैश्विक स्तर पर किए गए एक विश्लेषण से पता चलता है कि बच्चों में दृष्टि से संबंधित समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। हर तीन में से एक बच्चा निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) से पीड़ित पाया गया है।

आंखों की इस बीमारी में दूर की चीजों को देखने में कठिनाई होने लगती है। विशेषज्ञों की चिंता है कि जिस तरह से साल-दर-साल ये बीमारी बढ़ती जा रही है ऐसे में साल 2050 तक लाखों और बच्चे इसके शिकार हो सकते हैं।

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आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

एशियाई देशों में खतरा अधिक

ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में बच्चों में मायोपिया की बढ़ती समस्या को लेकर अलर्ट किया गया है। 50 देशों में पांच मिलियन (50 लाख) से अधिक बच्चों और किशोरों पर किए गए शोध में पाया गया है कि एशियाई देशों में इसका जोखिम सबसे अधिक देखा जा रहा है। जापान में 85% और दक्षिण कोरिया में 73% बच्चे निकट दृष्टि दोष से ग्रस्त हैं, जबकि चीन और रूस में 40% से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हैं।

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कम दिखाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com

बच्चों में बढ़ रहे हैं मायोपिया के मामले

पैराग्वे और युगांडा में मायोपिया का स्तर सबसे कम था, जहां लगभग 1% बच्चों में ये दिक्कत पाई गई है। यूके, आयरलैंड और यूएस में यह लगभग 15% है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड महामारी के बाद इस समस्या में और तेजी से वृद्धि हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मायोपिया आमतौर पर स्कूल के वर्षों के दौरान शुरू होता है और लगभग 20 वर्ष की आयु तक इसके लक्षण काफी बिगड़ सकते हैं। कई कारण हैं जो इस समस्या का खतरा बढ़ाते जा रहे हैं। अपने शुरुआती वर्षों में जिन बच्चों का स्क्रीन पर अधिक समय बीतता है उनमें इस बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।

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बच्चों में मायोपिया का जोखिम - फोटो : Freepik.com

स्मार्ट डिवाइस बढ़ा रहे हैं खतरा

इससे पहले  'द लैंसेट डिजिटल हेल्थ जर्नल' में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया था कि स्क्रीन टाइम ने बच्चों और युवाओं में मायोपिया के जोखिम को पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया है। स्मार्ट डिवाइस की स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताना मायोपिया के खतरे को 30 फीसदी तक बढ़ा देता है। इसके साथ ही कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग के कारण यह जोखिम बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया है। 

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मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के बारे में जानिए

नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) से संबंधित समस्या है, जिसमें रोगी को अपने निकट की वस्तुएं तो स्पष्ट रूप से देखती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई पड़ती हैं। इसमें आंख का आकार बदल जाता है। सामान्यतौर पर आंख की सुरक्षात्मक बाहरी परत कॉर्निया के बड़े हो जाने के कारण ऐसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंख में प्रवेश करने वाला प्रकाश ठीक से फोकस नहीं कर पाता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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