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Mpox: दो साल में दूसरी बार ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित हुआ एमपॉक्स संक्रमण, जानिए मंकीपॉक्स के बारे में सबकुछ

Thu, 15 Aug 2024 01:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 15 Aug 2024 01:25 PM IST
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mpox has been declared a global health emergency what is monkeypox and how is it transmitted
मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले - फोटो : amarujala.com

वैश्विक स्तर पर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों ने स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। साल 2019 के आखिर के महीनों में शुरू हुई कोरोना महामारी को इसकी गंभीरता और जटिलताओं को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। कोरोना के मामले तो अब काफी नियंत्रित हैं, लेकिन अब एक और बीमारी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रही है।



मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफ्रीकी महाद्वीप में इन दिनों मंकीपॉक्स संक्रमण काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसे एमपॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। इस साल अफ्रीका में 14,000 से अधिक मामले और 524 मौतें रिपोर्ट की गई हैं। एमपॉक्स के खतरे को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने बुधवार (14 अगस्त) को इसे 'वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2022 के बाद से दूसरी बार एमपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि एमपॉक्स के मामले दूसरे महाद्वीपों में भी फैल सकते हैं, ऐसे में इसको लेकर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। 

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मंकीपॉक्स का खतरा - फोटो : istock

अफ्रीकी देशों में बढ़ा खतरा

अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के प्रमुख जीन कासेया ने एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, "मैं नागरिकों की सेहत को लेकर काफी गंभीर हूं। लोगों के स्वास्थ्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता के साथ हम एमपॉक्स को महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करते हैं। सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से 4 अगस्त तक अफ्रीका में एमपॉक्स के 38,465 मामले और 1,456 मौतें हुई हैं।
 


डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ . टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने कहा, एमपॉक्स को लेकर आपातकालीन समिति ने बैठक की और मुझे सलाह दी कि यह अंतरराष्ट्रीय चिंता विषय है। मैंने  इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की सलाह को स्वीकार कर लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन जमीनी स्तर पर काम कर रहा है और प्रभावित देशों और जोखिम वाले अन्य लोगों के साथ काम कर रहा है।

आइए जानते हैं कि एमपॉक्स संक्रमण क्या है और इसके कारण किस प्रकार की जटिलताओं का खतरा हो सकता है?

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मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले - फोटो : istock

पिछले साल भी फैला था मंकीपॉक्स का संक्रमण

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल जुलाई-सितंबर के महीनों में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन में भी एमपॉक्स ने लोगों को खूब परेशान किया था। भारत में भी कोरोना संक्रमण के दौरान पहली बार इसके मामले रिपोर्ट किए गए थे।

मंकीपॉक्स के जोखिमों को देखते हुए डब्ल्यूएचओ की यूरोप शाखा ने इलीमिनेट एमपॉक्स नाम से एक कैंपेन भी चलाया है, जिसमें टीकाकरण और बचाव को लेकर लोगों को अलर्ट करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा था टीकाकरण करवाना बहुत महत्वपूर्ण है। कोई भी टीका 100% प्रभावी नहीं है और टीकाकरण के बाद भी संक्रमण संभव है, लेकिन इसका लाभ ये है कि संक्रमण के कारण रोग गंभीर रूप नहीं लेता है और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका कम हो सकती है।

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मंकीपॉक्स - फोटो : istock

मंकीपॉक्स संक्रमण के बारे में जानिए

एमपॉक्स या मंकीपॉक्स रोग, मंकीपॉक्स वायरस के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसमें त्वचा पर बड़े-बड़े छाले होने का साथ लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार की समस्या हो सकती है। इसका प्रकोप मुख्यरूप से समलैंगिक, बाइसेक्सुअल लोगों में अधिक देखा जाता रहा है। हालांकि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने एक रिपोर्ट में अलर्ट किया था कि यौन संबंधों के अलावा भी इस संक्रमण को जोखिम कई और तरीके से हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

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मंकीपॉक्स से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : istock

संक्रमण से बचाव कैसे करें?

एंटीवायरल दवा टेकोविरिमैट (TPOXX) जो मूल रूप से चेचक के लिए है, इसका एमपॉक्स के उपचार के लिए अध्ययन किया जा रहा है। यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में गंभीर एमपॉक्स मामलों के लिए जेएनएनईओएस (जिसे इम्वाम्यून या इम्वेनेक्स के रूप में भी जाना जाता है) नामक चेचक के टीके को भी मंजूरी दे दी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के घावों, शरीर के तरल पदार्थ या खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से भी ये संक्रमण हो सकता है। इससे बचाव को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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