साल 2050 तक भारत कई बीमारियों पर विशेष रोकथाम या उन्हें खत्म करने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। टीबी भी उन्हीं रोगों में से एक है। भारत सरकार इस रोग को खत्म करने के लक्ष्य के साथ तेजी से काम कर रही है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत साल 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन का आह्वान किया गया है। इस दिशा में हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से सुखद जानकारी साझा की गई है।
Analysis: भारत में टीबी के मामलों में आई गिरावट, पर क्या 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य हो पाएगा पूरा?
क्या 2025 तक भारत हो पाएगा टीबी से मुक्त
भारत सरकार ने साल 2025 तक देश से टीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा है, पर क्या वास्तव में ये पूरा हो पाएगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि वास्तव में भारत से तपेदिक को खत्म करने के लिए साल 2025 बहुत कम समय है।
इस संबंध में पीएमसी जर्नल में एक रिपोर्ट छपी जो कई प्रकार के सवाल खड़े करती है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में हर साल जहां टीबी के 256 नए मामले रिपोर्ट किए जाते थे, वह घटकर 2021 में 210 जरूर रह गया है, लेकिन देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य से यह अब भी कहीं अधिक है। वैश्विक आंकड़ों की तुलना में भारत में अब भी टीबी के नए मामलों की संख्या अधिक है।
टीबी से मृत्यु के आंकड़े भी बढ़ा रहे हैं चिंता
इसी तरह टीबी मृत्यु दर में कमी का लक्ष्य भी अभी काफी पीछे है। तपेदिक उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के अनुसार लक्ष्य 2020 में प्रति एक लाख पर 15 टीबी मृत्यु थी। लेकिन नई रिपोर्ट से पता चलता है कि यह आंकड़ा अब भी औसत 23 मौतों का है। टीबी के मामलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट भी भारत में टीबी रोग की चुनौतियों को अंडरलाइन करती है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में दुनियाभर में 10.6 मिलियन (1.06 करोड़) टीबी के नए मामलों का पता चला, आश्चर्यजनक रूप से इसमें भारत का हिस्सा 28% है। यह साल 2020 के टीबी के मामलों से 4.5 फीसदी अधिक है।
इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत उन आठ देशों में शामिल है, जहां कुल टीबी रोगियों की संख्या दो-तिहाई या 68.3 फीसदी से अधिक है। अन्य देश इंडोनेशिया (9.2% मामले), चीन (7.4%), फिलीपींस (7%), पाकिस्तान (5.8%), नाइजीरिया (4.4%), बांग्लादेश (3.6%) और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (2.9%) थे। भारत में भले ही मामले अब पहले की तुलना में कम रिपोर्ट हो रहे हैं, पर वैश्विक स्तर पर टीबी के कुल मामलों में भारत का हिस्सा अब भी बड़ा है, यह निश्चित ही चिंताजनक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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