मानसून के इस मौसम में सभी लोगों को सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। बरसात के दिनों में जलजमाव और गंदगी के कारण जहां कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, वहीं खान-पान में होने वाली गड़बड़ी के कारण स्टमक फ्लू होने का जोखिम भी अधिक रहता है। पेट के फ्लू को वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस भी कहा जाता है, जिसके कारण आपको पाचन से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
Stomach Flu: मानसून के दिनों में बहुत आम है पेट की ये दिक्कत, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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बरसात के दिनों में बढ़ जाता है खतरा
मानसून के दौरान गैस्ट्रोएंटेराइटिस या पेट संबंधी अन्य समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। इसका सबसे पहला कारण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता की खराबी होती है और दूसरा, मानसून के दौरान खान-पान को लेकर बरती गई असावधानियों को माना जाता है। भोजन के रखरखाव में गड़बड़ी, फलों-सब्जियों को अच्छे से साफ किए बिना उनका सेवन करने या अधपका-बासी भोजन करने के कारण गैस्ट्रोएंटेराइटिस हो सकता है।
चूंकि बरसात के दिनों में इसके वायरस तेजी से बढ़ते हैं इसलिए नम मौसम में इस प्रकार के रोग अधिक देखे जाते रहे हैं।
ऐसे जानें कहीं आपको स्टमक फ्लू तो नहीं?
गैस्ट्रोएंटेराइटिस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के तुरंत बाद शुरू हो जाते हैं। लक्षण 1 से 14 दिनों तक रह सकते हैं। इसमें आपको पाचन में गड़बड़ी से संबंधित कई तरह की दिक्कते होती हैं।
दिन में 3 बार से अधिक पतला दस्त होना, बुखार या ठंड लगना, उल्टी और सिरदर्द, मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द, पेट में ऐंठन और खाने की इच्छा न होना संकेत हो सकता है कि आपको स्टमक फ्लू हो गया है। स्टमक फ्लू के लक्षण डिहाइड्रेशन की स्थिति में और भी गंभीर हो सकते हैं।
स्टमक फ्लू से बचाव कैसे करें?
डॉक्टर बताते हैं, स्टमक फ्लू से बचाव के लिए सबसे आवश्यक है कि आप खान-पान की स्वच्छता को लेकर सावधानी बरतें। विशेषतौर पर इस मौसम में सब्जी-फलों को अच्छे तरीके से धोकर ही इनका सेवन किया जाना चाहिए। अपने हाथों को अच्छे से धोएं और सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे भी ऐसा करें। हाथों के माध्यम से भी बैक्टीरिया के पेट में पहुंचने का खतरा अधिक रहता है। जिन लोगों में यह संक्रमण हो, ऐसे किसी भी व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें।
ये सावधानियां भी बहुत जरूरी
गैस्ट्रोएंटेराइटिस या पेट संबंधी अन्य समस्याओं से बचाव के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं इस बात का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं बरसात के दिनों में किन चीजों का सेवन कम से कम किया जाना चाहिए।
- ऐडेड शुगर वाले फलों के जूस।
- कार्बोनेटेड या कैफीन युक्त पेय
- तले हुए खाद्य पदार्थ
- बाजार से लाकर तुंरत फलों-सब्जियों का सेवन न करें।
- अशुद्ध पानी बिल्कुल न पिएं। पानी को पहले उबालें और फिर इसे ठंडा करके ही पीना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।