जेनाइटल टीबी पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन के सबसे आम कारणों में से एक है। यह ज्यादातर महिलाओं में पाया जाता है और यह तब सामने आता है जब वे माँ न बन पाने की समस्या का सामना करती हैं और उपचार के लिए जाती हैं। पुरुषों में यह इसलिए बमुश्किल सामने आ पाता है। अगली स्लाइड्स से डॉ अमिता शाह , मेडिकल डायरेक्टर एंड हेड ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गाइनाकोलॉजिस्ट , मिरेकल्स मेडिक्लिनिक एंड अपोलो क्रैडल हॉस्पिटल , गुरुग्राम से जानते हैं इसके लक्षण और उपाय।
क्या टीबी बन सकता है बांझपन का कारण? जानिए लक्षण और उपाय
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क्या होता है जेनाइटल टीबी?
जब टीबी का संक्रमण फैलोपियन ट्यूब से यूट्रस में फैल जाता है, तब यह जेनाइटल टीबी कहलाता है। यह बीमारी महिलाओं के जननांग, ओवरी और सर्विक्स को भी प्रभावित करती है। इसे पेल्विक टीबी भी कहा जाता है। पुरुषों को भी यह बीमारी बुरी तरह से प्रभावित करती है। पुरुषों में जेनाइटल टीबी हो जाने पर शुक्राणु वीर्य तक नहीं पहुंच पाते हैं।
जेनाइटल टीबी के लक्षण
हालांकि यहां अधिकांश मामलों में कोई लक्षण या संकेत दिखाई नहीं देते हैं। कुछ लक्षणों की यदि बात करें तो उनमें वजन घटना, थकान और सैन्य बुखार, मासिक धर्म में असामन्य रूप से ज़्यादा खून बहना और असामान्य मासिकधर्म होना आम है। यह संक्रमण बहुत मुश्किल से पकड़ में आते हैं जिसका कारण है लोगों में जागरूकता की कमी जो कि बहुत ही घातक साबित हो सकती है। कुछ मामलों में बैक्टीरिया प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
गर्भधारण के उपाय
आईवीएफ गर्भधारण करने में मदद कर सकता है, लेकिन जेनाइटल ट्यूबरक्लोसिस से पीड़ित महिलाओं में आईवीएफ का पूरा ट्रीटमेंट होने के बाद भी उन्हें नुकसान पंहुच सकता है । जेनाइटल टी बी के लक्षण हो सकता हो न दिखें या एटिपिकल लक्षण या किसी दूसरी क्लीनिकल कंडीशन के सामान्य हो सकती है जो इस स्थिति को और भी अधिक चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि हम उन रोगियों में टीबी की संभावना पर विचार करें जिनमें बांझपन, पुरानी पेल्विक दर्द और मासिक धर्म की गड़बड़ी के लक्षण हैं। यह उन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो टीबी संक्रमण के लिए उच्च जोखिम की श्रेणी में आती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में 2014 में इस बीमारी से 15 लाख लोगों की मौत हुई थी। दुनिया में जानलेवा बीमारियों में एचआईवी के साथ इस रोग का भी नंबर आता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक तदेपिक रिपोर्ट 2015 के मुताबिक, 2014 में टीबी के 96 लाख मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 58 फीसदी मामले दक्षिण-पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से थे।