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वैज्ञानिकों की चेतावनी: इस वजह से भारतीय लोगों में हाइपरटेंशन का खतरा है अधिक, जानिए कैसे रहें सुरक्षित?

Sun, 03 Oct 2021 05:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 03 Oct 2021 05:47 PM IST
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low sodium intake during hypertension, food with high sodium avoided
हाइपरटेंशन से करें बचाव - फोटो : pixabay

दुनियाभर में हृदय रोग के मामले साल-दर-साल तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हृदय रोग के प्रमुख कारकों में ब्लड-प्रेशर की समस्या को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सबसे ऊपर रखते हैं। विशेषकर हाई ब्लड-प्रेशर की समस्या स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती है। डॉक्टर कहते हैं, हाई ब्लड-प्रेशर (हाइपरटेंशन) एक ऐसी स्थिति है जो शरीर में तमाम प्रकार की गंभीर बीमारियों के प्रवेश का द्वार खोल देती है। उच्च रक्तचाप सीधे हमारे महत्वपूर्ण अंगों जैसे हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क, गुर्दे आदि से संबंधित है। यदि समय रहते इस समस्या का इलाज या नियंत्रण के उपाय न किए जाएं तो यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा देती है।  



स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो आहार को संतुलित और पौष्टिक रखकर रक्तचाप को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। जिन लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या हो उन्हें भोजन में सोडियम यानी नमक की मात्रा को कम कर देना चाहिए। आमतौर पर बाजार में मिलने वाली कई चीजों में नमक की मात्रा अधिक होती है, इन चीजों से दूरी बनाकर भी हाइपरटेंशन की समस्या से बचाव किया जा सकता है। आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं। 

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हाई ब्लड प्रेशर में आहार का रखें ध्यान - फोटो : iStock
हाइपरटेंशन में क्या खाएं-क्या नहीं?
हाइपरटेंशन और हृदय रोगों की तमाम समस्याओं से बचे रहने के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सभी लोगों को स्वस्थ आहार पैटर्न रखने का सुझाव देती है। इसके लिए आहार में सब्जियों, फलों, नट्स, साबुत अनाज, प्रोटीन और मछली के सेवन पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचे रहने के लिए लोगों को ट्रांस फैट, रेड मीट, प्रोसेस्ड रेड मीट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शर्करा युक्त पेय पदार्थों का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। आहार में सोडियम की मात्रा को नियंत्रित रखना सबसे आवश्यक है, रक्तचाप की समस्याओं से बचे रहने के लिए सभी लोगों को दिन में 2,300 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में सोडियम का सेवन नहीं करना चाहिए।
 
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खाने में कम करे लें सोडियम की मात्रा - फोटो : iStock
सोडियम को क्यों माना जाता है नुकसानदायक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक आहार में नमक या सोडियम का मात्रा को कम करके आपको रक्तचाप नियंत्रित करने में काफी मदद मिल सकती है। असल में नमक में पाई जाने वाली सोडियम की मात्रा रक्त में द्रव के संतुलन को प्रभावित कर देती है। मायो क्लिनिक के सुझावों के अनुसार जिन लोगों को रक्तचाप की समस्या नहीं है वह रोजाना 2,300 मिलीग्राम वहीं जो लोग रक्तचाप के शिकार हैं उन्हें 1500 मिलीग्राम से अधिक की मात्रा में सोडियम का सेवन नहीं करना चाहिए। घर के बने खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है। हाइपरटेंशन के रोगियों को आगे की स्लाइडों में बातई जा रही चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
 
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ब्लड प्रेशर में बरतें विशेष सावधानी - फोटो : Pixabay

हाइपरटेंशन में किन चीजों से करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या हो उन्हें आहार को बहुत संतुलित रखने के साथ भोजन में सोडियम की मात्रा पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसे लोगों को पिज्जा और सैंडविच जैसी चीजों से दूरी बनानी चाहिए, इनमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है जिससे आपके ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ सकता है। इसके अलावा चिप्स, नमकीन और कई तरह के अन्य पैक्ड फूड आइटम भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 

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नमक का इस्तेमाल कम करें - फोटो : iStock

भारत में प्रतिव्यक्ति सोडियम का सेवन है अधिक
द यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स, सिडनी द्वारा साल 2006 में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत के लोग नमक का सेवन अधिक करते हैं। भारत में नमक के सेवन के स्तर पर हाल के आंकड़ों से पता चलता है यहां प्रति व्यक्ति सोडियम का सेवन लगभग 11 ग्राम प्रतिदिन है यह डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गए मात्रा से प्रतिदिन 5 ग्राम से अधिक है। इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते भारत में नमक के सेवन को कम न किया गया को आने वाले एक दशक में यहां हृदय रोगियों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। 


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नोट:  यह लेख तमाम मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें। 
 

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