कोरोना से उबरने के बाद भी लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। बहुत सारे लोगों के हार्ट और फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें सांस संबंंधी परेशानियां हो रही है। कोरोना से ठीक होने के महीनों बाद भी मरीज खुद को पहले की तरह पूरी तरह स्वस्थ और तंदुरुस्त महसूस नहीं कर रहे हैं। उनमें थकान, मांसपेशियों में दर्द, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है। ऐसी स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जा रहा है। हालांकि अबतक लॉन्ग कोविड की न तो कोई मेडिकल परिभाषा तय है और न ही इसके लक्षण एक जैसे होते हैं। इस संबंध में कई तरह के शोध अध्ययन हुए हैं और आगे भी हो रहे हैं। आइए, लॉन्ग कोविड को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं:
Long Covid: क्या होता है लॉन्ग कोविड, क्या हैं लक्षण और इसे क्यों कहा जा रहा कोरोना के बाद नया खतरा?
दरअसल, बहुत सारे मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद भी इसके कुछ लक्षण रह जाते हैं, जो लंबे समय तक परेशान कर सकती है। दो से तीन महीने बाद भी लोगों में कोरोना का साइड इफेक्ट दिख रहा है और उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो जा रही हैं। इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जा रहा है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में कई अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं लेकिन 'थकान' इसका एक आम लक्षण है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए शोध अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में कई महीनों तक कोरोना वायरस का असर दिख रहा है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में थकान की शिकायत कॉमन है, जबकि इसके अन्य लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, देखने-सुनने की समस्याएं, गंध और स्वाद महसूस करने की क्षमता का कम हो जाना आदि शामिल हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी की समस्या भी दिखती है।
कोरोना संक्रमण के बाद दिल, फेफड़ों, किडनी और लिवर को भी नुकसान होने की संभावना रहती है। लॉन्ग कोविड को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि,
- कोरोना से रिकवरी के बाद भी मरीजों में समस्याएं बरकरार हैं
- ठीक से नहीं काम कर रहे हैं फेफड़े और दिल
- 64 फीसदी मरीजों को सांस लेने में तकलीफ
- 26 फीसदी मरीजों को हार्ट संबंधी दिक्कतें
- 29% को किडनी और 10% को लिवर संबंधी समस्या
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के एक जर्नल में रोम के एक अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे 143 मरीजों पर की प्रकाशित एक शोध अध्ययन के मुताबिक, 87 फीसदी लोगों में दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण दिखा। करीब आधे लोगों को थकान की शिकायत महसूस हुई है। हालांकि, यह अध्ययन अस्पताल में भर्ती हुए लोगों यानी कि कोरोना के गंभीर मरीजों पर हुई है। लेकिन घरों में आइसोलेट रहकर और डॉक्टरी सलाह से दवा लेकर ठीक होने वाले मरीजों के साथ भी ऐसा हो सकता है।