बीएमआई(BMI) यानी बॉडी मास इंडेक्स को एक तरह से आपके शरीर की लंबाई और वजन का अनुपात कहा जा सकता है। बीएमआई ये तो बताता है कि आपके शरीर का वजन आपकी हाईट यानी लंबाई के अनुसार ठीक है या नहीं, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। बीएमआई में ये पता लगना मुश्किल हो जाता है कि आपके शरीर के किस हिस्से में कितनी चर्बी यानी फैट जमा है।
केवल बीएमआई नहीं हो सकता स्वस्थ शरीर और मानक वजन का आधार, उम्र और लिंग से भी पड़ता है असर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएमआई की सीमाएं
विशेषज्ञ बताते हैं कि बीएमआई स्वस्थ शरीर के वजन का एक संकेतक है, लेकिन इसकी सीमाएं हैं। बीएमआई शरीर की संरचना को ध्यान में नहीं रख सकता है। मांसपेशियों, हड्डी के वजन और फैट के कारण शरीर की अपनी विविधता है। ऐसे में केवल मानक बीएमआई के आधार पर स्वस्थ शरीर का आकलन किया जाना उचित नहीं है।
वयस्कों के संदर्भ में बीएमआई की सीमाएं
बीएमआई पूरी तरह से सही नहीं हो सकता है, क्योंकि यह शरीर के अतिरिक्त वजन की माप है, इससे शरीर में अतिरिक्त फैट का पता नहीं चल पाता। अलग-अलग उम्र, लिंग, मांसपेशियों और शरीर में फैट जैसे कारकों से बीएमआई प्रभावित होता है।
उदाहरण के लिए, एक व्यस्क व्यक्ति जो बीएमआई के अनुसार स्वस्थ वजन का माना जाए, लेकिन वह अपने दैनिक जीवन में पूरी तरह से निष्क्रिय है यानी कि वर्कआउट नहीं करता तो ऐसे में उसके शरीर में अतिरिक्त फैट हो सकता है, भले ही उसके शरीर में अतिरिक्त वजन न हो। केवल बीएमआई के आधार पर वह व्यक्ति स्वस्थ नहीं माना जाएगा, जबकि उसी बीएमआई का उच्च मांसपेशी संरचना उससे छोटा व्यक्ति स्वस्थ माना जाएगा।
- एक ही बीएमआई वाले छोटे वयस्क की तुलना में बड़े वयस्क में शरीर में वसा(फैट) अधिक होती है।
- महिलाओं में एक समान बीएमआई के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक शरीर में वसा होता है।
- मांसपेशियों और उच्च प्रशिक्षित एथलीटों में मांसपेशियों के कारण बीएमआई अधिक हो सकता है।