दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण के कारण जहां लोगों को गंभीर लक्षणों का अनुभव हुआ, वहीं ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स की संक्रामकता दर चिंता बढ़ाने वाली है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई लोगों में इससे संबंधित दिक्कतें, संक्रमण से ठीक होने के छह महीने से लेकर एक साल तक भी देखी जा रही हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कोरोना के दौरान और इससे ठीक होने के बाद भी बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
Long Covid Syndrome: अध्ययन में दावा- वैरिएंट्स की प्रकृति पर निर्भर करते हैं पोस्ट कोविड के लक्षण, ऐसे लोगों में खतरा अधिक
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लॉन्ग कोविड की समस्या को लेकर अध्ययन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण से रिकवरी के बाद भी कुछ लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं, इसे लॉन्ग या पोस्ट कोविड सिंड्रोम के तौर पर जाना जाता है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को अल्फा या डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण रह चुका है, उनमें ओमिक्रॉन संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों से अलग तरह के लॉन्ग कोविड के लक्षण हो सकते हैं। यह लक्षण वैरिएंट की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। शोध के निष्कर्ष अगले महीने लिस्बन में यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ECCMID 2022) में प्रस्तुत किए जाएंगे।
शोध में क्या पता चला?
इतालवी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में जून 2020 से लेकर जून 2021 तक केयरगी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में पोस्ट कोविड का इलाज करा रहे 428 रोगियों के डेटा का अध्ययन किया गया। कोरोना के मूल वैरिएंट से संक्रमितों में लॉन्ग कोविड के रूप में मांसपेशियों में दर्द, अनिद्रा, तनाव-अवसाद जैसी दिक्कतें देखी जा रही थीं। वहीं डेल्टा वैरिएंट से संक्रमितों में लंबे समय तक स्वाद-गंध न आने जैसी दिक्कतें काफी सामान्य देखी गई हैं। वायरस अपनी प्रकृति के आधार पर लोगों के लिए समस्याओं का कारण बनता दिख रहा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इटली स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरेंस के प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मिशेल स्पिनिकी कहते हैं, लॉन्ग कोविड की समस्या इस बात का सूचक है कि टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ जाने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से ठीक हो गए हैं, आगे भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। कई लोगों में यह दिक्कत एक साल तक बनी देखी गई है। संक्रमितों को ठीक होने के बाद भी लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए।
लॉन्ग कोविड का जोखिम
अध्ययन के विश्लेषण के अनुसार, जो लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और इलाज के दौरान उन्हें इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाओं की आवश्यकता हुई थी, ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों के रिपोर्ट करने की आशंका 6 गुना अधिक हो सकती है। वहीं जिन लोगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता थी, उनमें पोस्ट कोविड के लक्षण होने की आशंका 40 प्रतिशत अधिक पाई गई है।